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लखनऊ में ट्रेन डिरेल करने की कोशिश, पटरी पर रखा 50 किलो का चौखट, लोको पायलट की सतर्कता से टला हादसा

लोको पायलट की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। अगर समय रहते इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगाया गया होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Train derail- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT पटरी पर रखा गया चौखट

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक बार फिर ट्रेन को डिरेल करने की साजिश हुई, लेकिन लोको पायलट की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। कैंट के दिलकुशा ब्लॉक हट के पास शुक्रवार दोपहर पंजाब मेल के आने से पहले रेलवे ट्रैक पर 50 किलो वजनी लोहे का चौखट रख दिया गया था। चौखट किसने रखा ये अब तक पता नहीं चला है, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पंजाब मेल कैंट के पास पहुंचे तो लोको पायलट को लोहे की चौखट दिखी। उन्होंने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए। लोको पायलट की सतर्कता के बावजूद ट्रेन चौखट पर चड़ गई और लोहे का चौखट इंजन में फंस गया। इस मामले में कैंट थाने में एफआईआर दर्ज की गई है

आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची

13006 पंजाब मेल अमृतसर से हावड़ा जा रही थी। इस दौरान इंजन के नीचे लोहे का चौखट फंसने से काफी देर तक ट्रेन खड़ी रही। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे ट्रेन जब कैंट के दिलकुशा ब्लॉक हट के पास पहुंची, तभी लोको पायलट ने ट्रैक पर लोहे का बड़ा चौखट पड़ा देखा। उन्होंने बिना देरी किए इमरजेंसी ब्रेक लगा दी। इसके बावजूद इंजन ट्रैक पर रखे 50 किलो वजनी लोहे के चौखट से टकरा गया और वह इंजन के नीचे फंस गया। लोको पायलट ने तत्काल स्टेशन मास्टर को सूचना दी। सूचना मिलने पर रेलवे के अधिकारी और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। चौखट को हटाकर आरपीएफ को सुपुर्द कर दिया गया।

2025-26 में ट्रेन से पटरी से उतरने के 28 मामले

रेलवे बोर्ड ने बताया था कि 2025-26 में ट्रेन के पटरी से उतरने की 28 घटनाएं हुईं। इनमें से 18 उन स्थानों पर पर हुईं, जहां रेलगाड़ी एक पटरी से दूसरी पटरी पर जाती हैं। पटरी बदलने के इस 'टर्नआउट' को पॉइंट्स और 'क्रॉसिंग्स' भी कहा जाता है। ये रेलमार्ग के ऐसे हिस्से हिस्से होते हैं, जहां से ट्रेन एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर जाती हैं। रेलवे बोर्ड ने अपने सभी मंडलों को भेजे पत्र में कहा था, ''2025-26 के दौरान इंजीनियरिंग कारणों (ट्रैक से जुड़ी समस्याओं) से ट्रेन के पटरी से उतरने की 28 घटनाओं में से 18 मामले (लगभग 65 प्रतिशत) टर्नआउट पर हुए हैं। इसलिए, रेलमार्ग के रखरखाव में टर्नआउट पर मुख्य रूप से ध्यान देना जारी रखना चाहिए।'' मंडलों को निर्देश दिया गया है कि वे पटरी से जुड़े पुराने कामों की निगरानी करें और उन्हें तेजी से पूरा करें। बोर्ड ने कहा कि मौजूदा 141 कार्य 10 साल से भी ज्यादा पुराने हैं और उन्हें पूरा करने के लिए 1,334 करोड़ रुपये की जरूरत है।

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