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VIDEO: फूल, गुब्बारे और 'तेरी मेहरबानियां' गाना, धूमधाम से निकली स्ट्रीट डॉग ‘कालू’ की अंतिम यात्रा

Last Rites of Dog: बागपत में मोहल्ले वालों ने स्ट्रीट डॉग कालू की अंतिम यात्रा निकाली है। लोगों ने रेहड़ी पर कालू की अर्थी बनाई और उसे फूल-माला और गुब्बारों से सजाया। अंतिम यात्रा के वक्त तेरी मेहरबानियां गाना भी बजाया गया।

Baghpat dog funeral video- India TV Hindi
Image Source : REPORTERS INPUT बागपत में लोगों ने स्ट्रीट डॉग की अंतिम यात्रा निकाली है।

Street Dog Last Rites: उत्तर प्रदेश के बागपत से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने इंसान और जानवर के बीच के अनोखे रिश्ते को एक बार फिर जीवंत कर दिया है। यहां एक स्ट्रीट डॉग ‘कालू’ की मौत के बाद मोहल्ले के लोगों ने जिस तरह से उसे अंतिम विदाई दी, वह अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। बताया जा रहा है कि ‘कालू’ कोई साधारण कुत्ता नहीं था, बल्कि पूरे मोहल्ले का लाडला था। वह वर्षों से गली में रह रहा था और हर घर के साथ उसका एक खास जुड़ाव था। बच्चे उसके साथ खेलते थे, तो बड़े उसे परिवार के सदस्य की तरह मानते थे।

कई दिनों से बीमार था 'कालू'

मोहल्ले के लोगों के मुताबिक, कालू बेहद शांत स्वभाव का था और हर किसी के सुख-दुख का हिस्सा बन चुका था लेकिन कुछ दिनों से कालू बीमार चल रहा था। स्थानीय लोगों ने उसकी देखभाल भी की, लेकिन उम्र लगभग पूरी हो जाने से अब उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। जैसे ही उसकी मौत की खबर फैली, पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। इसके बाद जो हुआ, उसने इस घटना को खास बना दिया।

फूल-माला से सजकर निकली अंतिम यात्रा

मोहल्ले के लोगों ने मिलकर फैसला लिया कि कालू की अंतिम विदाई किसी इंसान की तरह सम्मानपूर्वक की जाएगी। इसके लिए सभी ने चंदा इकट्ठा किया और फिर एक रेहड़ी पर चारों तरफ फूल-मालाओं और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजी उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई। गली से लेकर शहर की सड़कों तक लोग इस अनोखी यात्रा को देखते रह गए।

रीति-रिवाज से कालू को किया गया दफन

म्यूजिकल गानों की धुन के बीच निकली इस अंतिम यात्रा में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी लोग शामिल हुए। आखिर में यमुना नदी किनारे एक स्थान पर गड्ढा खोदकर पूरे रीति-रिवाज के साथ कालू को अंतिम विदाई दी गई। यह अनोखी घटना सिर्फ एक कुत्ते की विदाई नहीं, बल्कि इंसानियत और भावनाओं की मिसाल बन गई है, जो यह दिखाती है कि प्यार और अपनापन किसी जाति या प्रजाति का मोहताज नहीं होता।

(इनपुट- पारस जैन)

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