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यूपी के सरकारी अस्पतालों में फ्री में होगी स्वाइन फ्लू की जांच, सीएम योगी बोले- प्राइवेट लैब भी ज्यादा पैसे न वसूलें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) की जांच सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त कराये जाने के निर्देश दिये हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ- India TV Hindi
Image Source : PTI मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। फाइल

लखनऊः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को निर्देश दिया कि राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लूएंजा-A (H1N1) की जांच मुफ्त की जाए। साथ ही उन्होंने उन जिलों में निगरानी और इलाज की व्यवस्था को और मजबूत करने का आदेश दिया जहां मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं।

प्राइवेट लैब भी ज्यादा पैसे न वसूलेंः सीएम

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्य में इन्फ्लूएंजा-A और मौसमी इन्फ्लूएंजा की स्थिति की समीक्षा करते हुए आदित्यनाथ ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों को H1N1 जांच के लिए तय फीस से ज्यादा पैसे न लेने का निर्देश दिया। उन्होंने अस्पतालों से पर्याप्त दवाएं, जांच और आइसोलेशन की सुविधा सुनिश्चित करने और गंभीर मरीजों के लिए अलग ICU वार्ड तैयार करने को भी कहा। बयान में कहा गया है कि उन्होंने H1N1 से बचाव और इलाज के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी करने, प्रभावी टेली-कंसल्टेशन सेवाएं शुरू करने और संदिग्ध मामलों की पहचान के लिए ANM, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से स्क्रीनिंग तेज करने का भी आदेश दिया।

यूपी में स्वाइन फ्लू के 685 मरीज

बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि बुधवार तक राज्य में प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए H1N1 के 685 मामले सामने आए हैं। यह संक्रमण, जो इन्फ्लूएंजा-A वायरस का एक प्रकार है, मुख्य रूप से खांसने या छींकने पर निकलने वाली बूंदों से फैलता है। इसमें बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और आंखें लाल होना जैसे लक्षण शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "मरीजों की समय पर पहचान और इलाज सुनिश्चित करें। जिन जगहों पर मामले बढ़ रहे हैं, वहां निगरानी बढ़ाई जाए और तुरंत जरूरी चिकित्सा व्यवस्था की जाए।"

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि हल्के लक्षणों वाले मरीजों को चिकित्सीय सलाह के अनुसार घर पर आराम करने और खुद को आइसोलेट करने की सलाह दी जाए, जबकि गंभीर मामलों में तुरंत इलाज किया जाए। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। अस्पतालों से कहा गया कि वे इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों वाले मरीजों के लिए अलग काउंटर रखें और मरीज की स्थिति के आधार पर रेफरल सिस्टम सुनिश्चित करें, ताकि गंभीर मामलों का समय पर इलाज हो सके और अस्पतालों पर अनावश्यक बोझ न पड़े। इससे पहले डिप्टी सीएम ब्रिजेश पाठक ने स्वाइन फ्लू को लेकर कहा था कि प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों को और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा है।  

(पीटीआई इनपुट के साथ)

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