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पत्नी के हत्यारे पति को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा, एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया

मुजफ्फरनगर में करीब आठ साल पुराने दहेज हत्या के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। शाहपुर थाना क्षेत्र की विवाहिता की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए उसके पति नदीम को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा दी है।

Muzaffarnagar- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT पत्नी के हत्यारे पति को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

मुजफ्फरनगर में शाहपुर क्षेत्र में करीब आठ साल पहले हुई विवाहिता की मौत के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 7 सितंबर को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने और उसकी मौत के मामले में आरोपी पति नदीम को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

मामला 23 जुलाई 2018 का है। बागपत के निवाड़ा निवासी दिलशाद ने शाहपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को शादी के बाद दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाता था। उसके साथ मारपीट की गई और बाद में मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने का आरोप लगाया गया। गंभीर रूप से झुलसी विवाहिता ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था।

दहेज के लिए की गई हत्या

शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 360/2018 दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी नदीम के खिलाफ IPC की धारा 498ए, 304बी, 302 और 504 के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3/4 के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए 26 अगस्त 2018 को आरोपी नदीम को गिरफ्तार किया। विवेचना पूरी करने के बाद 23 नवंबर 2018 को उसके खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया। इसके बाद मामला न्यायालय में चला, जहां अभियोजन पक्ष ने गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।

नदीम धारा 302 और 504 में दोषी करार

मुजफ्फरनगर पुलिस के मुताबिक, मामले में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी की गई। गवाहों को समय पर अदालत के सामने पेश कराया गया और अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। ADGC कुलदीप कुमार और कोर्ट पैरोकार कांस्टेबल सुमित झां ने भी मामले की पैरवी में भूमिका निभाई।

एडीजे/एफटीसी कोर्ट नंबर-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 7 सितंबर 2026 को आरोपी नदीम को IPC की धारा 302 और 504 के तहत दोषी माना। अदालत ने उसे मृत्युदंड के साथ एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। पुलिस ने अदालत के इस फैसले को गंभीर अपराधों में प्रभावी जांच और मजबूत अभियोजन पैरवी का परिणाम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, गंभीर आपराधिक मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

(रिपोर्ट: योगेश त्यागी)

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