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CBI ने शुरू की ग्रेटर नोएडा के PNB बैंक फ्रॉड केस की जांच, FIR दर्ज होने के बाद एक्शन; जानें क्या है 10.24 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला

ग्रेटर नोएडा के पीएनबी बैंक में 10.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। जानें ये पूरा मामला क्या है।

Greater Noida PNB Fraud- India TV Hindi
Image Source : PTI (प्रतीकात्मक फोटो) CBI ने शुरू की ग्रेटर नोएडा के PNB बैंक फ्रॉड केस की जांच।

यूपी के ग्रेटर नोएडा में सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में ग्राहकों के खातों से कथित तौर पर 10.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले की जांच अब CBI कर रही है। इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। बता दें कि बैंक की महिला कर्मचारी पर अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों से पैसे निकालने का आरोप है। कथित रूप से यह गड़बड़झाला करीब तीन साल से चल रहा था। बैंक की शुरुआती जांच में एक महिला कर्मचारी समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। 

CBI ने शुरू की बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच

आरोप है कि बैंक में तैनात महिला कर्मचारी ने दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे निकाले और उन्हें अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कराया। यह गड़बड़ी करीब तीन साल तक चलती रही। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद ने 29 अक्टूबर 2026 को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ग्राहक की शिकायत से खुला पूरा मामला

पीएनबी की ओर से सीबीआई को दी गई शिकायत के मुताबिक, इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब बैंक की एक ग्राहक संगीता अपने पति और बेटी के साथ सेक्टर पाई शाखा में पासबुक अपडेट कराने पहुंचीं। इस दौरान, उन्हें 16 सितंबर 2026 को उनके खाते से तीन ऐसे ट्रांजेक्शन का पता चला, जिनकी जानकारी उन्हें नहीं थी। उन्होंने बैंक के अधिकारियों से इसकी शिकायत की और शाखा प्रबंधक से मिलने की बात कही। हालांकि, उस समय शाखा प्रबंधक मौजूद नहीं थीं। 

इसके बाद, बैंक में तैनात महिला कर्मचारी दीपांशी ने उनसे बात की और ट्रांजेक्शन को सही बताने की कोशिश की। बाद में जब यह मामला शाखा प्रबंधक के संज्ञान में आया तो उन्होंने दीपांशी से पूछताछ की। दीपांशी ने बताया कि ग्राहक ने अपने पति से फोन पर बात करके संपत्ति में निवेश करने और रकम आशुतोष पाठक के खाते में ट्रांसफर करने की जानकारी दी थी। हालांकि, जब बैंक ने इन तीनों ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज और वाउचर तलाशे तो वे रिकॉर्ड में नहीं मिले। इसके बाद बैंक प्रबंधन का शक गहरा गया।

पूछताछ में महिला कर्मचारी ने बताई कथित गड़बड़ी की पूरी कहानी

बैंक की शिकायत के अनुसार, पूछताछ के दौरान दीपांशी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने आशुतोष पाठक के कहने पर ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे ट्रांसफर किए थे। उसने यह भी बताया कि बैंक के दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करके ये ट्रांजेक्शन किए गए थे। इन ट्रांजेक्शन से जुड़े वाउचर भी उसने नष्ट कर दिए थे, क्योंकि ग्राहकों की तरफ से पैसे ट्रांसफर करने की कोई अनुमति नहीं थी और न ही संबंधित अधिकारियों की मंजूरी थी।

इसके बाद, बैंक ने आशुतोष पाठक के खाते की जांच की। शिकायत में कहा गया है कि यह खाता भी दीपांशी ने ही खुलवाया था। बैंक के रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि कई ग्राहकों के खातों से निकाली गई रकम सीधे आशुतोष पाठक के खाते में भेजी गई या फिर प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी के खातों के जरिए वहां पहुंचाई गई। कुछ रकम निकाली भी गई।

6 बैंक अधिकारियों की यूजर आईडी का इस्तेमाल करने का आरोप

बैंक की शुरुआती जांच में सामने आया कि दीपांशी ने शाखा के 6 अधिकारियों की सीबीएस (कोर बैंकिंग सिस्टम) यूजर आईडी का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया। इनमें सीनियर ब्रांच मैनेजर निशा तिर्की, सीनियर कस्टमर सर्विस एसोसिएट संदीप प्रकाश शर्मा, कस्टमर सर्विस एसोसिएट मीनाक्षी, सतीश कुमार, रिलेशनशिप मैनेजर शैलेंद्र कुमार और अधिकारी लवली जैन के नाम शामिल हैं। बैंक के मुताबिक, सिस्टम लॉग और यूजर एक्टिविटी रिकॉर्ड की शुरुआती जांच में अलग-अलग अधिकारियों की यूजर आईडी के जरिए ग्राहकों के खातों में कई अनधिकृत ट्रांजेक्शन किए जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि, इन अधिकारियों की जानकारी या सहमति से यूजर आईडी का इस्तेमाल हुआ था या नहीं, इसकी जांच की जानी बाकी है।

मोबाइल अलर्ट बंद कर ग्राहकों से छिपाए गए ट्रांजेक्शन

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ ग्राहकों के खातों में ट्रांजेक्शन से जुड़े मोबाइल अलर्ट बंद या उनमें बदलाव कर दिया गया था। इससे खातों से पैसे निकलने की जानकारी ग्राहकों को तुरंत नहीं मिल पाती थी और धोखाधड़ी का पता चलने में देरी होती थी। इसके अलावा, बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में भी गड़बड़ी किए जाने की बात सामने आई है। शुरुआती जांच में पता चला कि कई एफडी में आशुतोष पाठक और अन्य लोगों को संयुक्त खाताधारक बनाया गया। इसके बाद एफडी से जुड़ी रकम वापस आने वाले खाते की जानकारी बदली गई और एफडी को समय से पहले बंद करा दिया गया। एफडी बंद होने के बाद मिली रकम कथित तौर पर संदिग्ध लोगों से जुड़े खातों में ट्रांसफर कर दी गई।

करीब 10.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का दावा

पीएनबी की शिकायत के मुताबिक, अब तक की शुरुआती जांच में अलग-अलग ग्राहकों के खातों से करीब 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी की जानकारी मिली है। बैंक का कहना है कि यह रकम दीपांशी ने आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी, सरोज देवी और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर कथित तौर पर निकाली। यह गड़बड़ी करीब तीन साल से चल रही थी। बैंक ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के खातों से हुए सभी ट्रांजेक्शन का मिलान अभी किया जा रहा है। जांच के दौरान, प्रभावित खातों और लाभार्थियों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए धोखाधड़ी की कुल रकम में भी बदलाव संभव है।

बैंक की शिकायत के साथ एफडी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की एक सूची भी दी गई है।  इसमें 49 एफडी का ब्योरा और उनके बंद होने के बाद ट्रांसफर की गई रकम दर्ज है। इस सूची में कुल 7023.77 लाख रुपये का आंकड़ा दर्ज है। हालांकि, यह आंकड़ा शिकायत में बताई गई 10.24 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से अलग है। दोनों आंकड़ों का आपसी संबंध और पूरा हिसाब जांच का विषय है।

आशुतोष पाठक से पहले से जान-पहचान होने की बात

पीएनबी के सक्षम अधिकारी की ओर से जारी मंजूरी आदेश में दीपांशी के 10 अक्टूबर 2026 के बयान का भी जिक्र है। इसके मुताबिक, आशुतोष पाठक पहले से दीपांशी को जानता था। आरोप है कि आशुतोष ने पहले उसके पिता के साथ करीब 15 से 20 लाख रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी की थी। बाद में उसने रकम वापस दिलाने का भरोसा देकर दीपांशी को और पैसे लगाने के लिए कहा। इस भरोसे पर दीपांशी ने कथित तौर पर लोन लेकर करीब 4 से 5 लाख रुपये और लगाए थे।

आरोप है कि इसके बाद दीपांशी ग्राहकों के खातों से जुड़े संदिग्ध ट्रांजेक्शन में शामिल हो गई और बैंक के दूसरे कर्मचारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल किया। हालांकि, इस पूरे मामले में अलग-अलग लोगों की भूमिका, उनकी जानकारी और धोखाधड़ी के पीछे की असली वजह की पुष्टि दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

डीएसपी जाहिर अख्तर को सौंपी गई जांच

पीएनबी के मुख्य प्रबंधक अजय कुमार पांडेय ने 23 अक्टूबर 2026 को सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद में शिकायत दी थी। बैंक ने मामले की शुरुआती जांच के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत सक्षम अधिकारी से मंजूरी भी ली थी। इसके बाद सीबीआई ने 29 अक्टूबर 2026 को एफआईआर नंबर RC1202026A0013 दर्ज की। एफआईआर में बैंक कर्मचारी दीपांशी, आशुतोष पाठक और अन्य निजी व अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 316, 318 और 344, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के साथ 43 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सीबीआई ने मामले की जांच डीएसपी डॉ. जाहिर अख्तर को सौंपी है। बैंक ने भी अपने स्तर पर संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंक का कहना है कि जांच में मांगे जाने पर सभी दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और सिस्टम लॉग सीबीआई को उपलब्ध कराए जाएंगे। फिलहाल सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित धोखाधड़ी में कितने ग्राहक प्रभावित हुए, कितनी रकम किन-किन खातों में भेजी गई और बैंक के अन्य कर्मचारियों या खाताधारकों की इसमें क्या भूमिका रही। इससे पहले, हाल में ग्रेटर नोएडा के PNB बैंक घोटाला मामले में स्टाफ को सस्पेंड किया गया था।

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