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कानपुर का 'टेंट ठगी कांड', कहीं से उठाया भगोने-कढ़ाई, कहीं से बर्तन-दरी… कबाड़ में बेचते रहे चाचा-भतीजे!

यूपी के कानपुर में अजीब मामला सामने आया है। इसमें चाचा और भतीजे की जोड़ी टेंट हाउस से सामान लाकर उसे कबाड़ में बेच दिया करते थे। कई दिनों से ये काम चल रहा था, लेकिन अब पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।

case of tent fraud has come to light in Kanpur.- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT कानपुर में टेंट ठगी का मामला सामने आया है

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में टेंट कारोबारियों को निशाना बनाकर ठगी करने का ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें चाचा-भतीजे की जोड़ी ने शादी और भंडारे का आयोजन बताकर टेंट का सामान बुक कराया और फिर उसी सामान को कथित तौर पर कबाड़ में बेच दिया। करीब 5 किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग टेंट कारोबारियों को निशाना बनाया गया। आरोप है कि इस तरीके से करीब 9 लाख रुपये कीमत का सामान ठिकाने लगा दिया गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर सुमित और अमित को गिरफ्तार कर लिया है।

शादी का कार्ड दिखाने जैसा भरोसा, सामान उठाने के बाद असली खेल

आरोप है कि सुमित और अमित अलग-अलग समय पर टेंट कारोबारियों के पास पहुंचते थे। दोनों शादी, भंडारे या दूसरे समारोहों में टेंट लगाने की बात कहकर सामान बुक कराते थे। बातचीत के दौरान ऐसा माहौल बनाया जाता था कि कारोबारी भी उनकी बातों पर भरोसा कर लेते। किसी से बर्तन लिए गए तो किसी से भगोने और कढ़ाई, जबकि कहीं से परात, दरी और दूसरे टेंट से जुड़े सामान लिए गए।

थोड़ी पेशगी दी, फिर लाखों के सामान पर हाथ साफ

चाचा-भतीजे की कथित ठगी का तरीका यहीं तक सीमित नहीं था। सामान बुक कराने के दौरान दोनों कुछ रकम पेशगी के तौर पर देते थे। इससे कारोबारियों को भुगतान को लेकर भरोसा हो जाता और वे सामान उनके हवाले कर देते। धीरे-धीरे अलग-अलग टेंट हाउस से सामान जुटाया जाता रहा और कारोबारियों को यही लगता रहा कि सामान किसी आयोजन में इस्तेमाल होने के बाद वापस लौटा दिया जाएगा।

टेंट हाउस से निकला सामान समारोह में नहीं, कबाड़ में पहुंचा

आरोप है कि टेंट कारोबारियों से सामान लेने के बाद उसे शादी या भंडारे में इस्तेमाल करने के बजाय कबाड़ में बेच दिया जाता था। यानी जिस सामान की बुकिंग समारोह के नाम पर की गई, उसका इस्तेमाल कहीं और करने के बजाय उसे कबाड़ के जरिए ठिकाने लगाने का आरोप है। कारोबारी अपनी बुकिंग का सामान वापस आने का इंतजार करते रहे, जबकि आरोपी कथित तौर पर सामान को धीरे-धीरे बेचते रहे।

एक कारोबारी का सामान नहीं लौटा तो खुलने लगी पूरी कहानी

जब सामान तय समय पर वापस नहीं पहुंचा और कारोबारियों को भुगतान को लेकर भी परेशानी होने लगी तो शक गहराने लगा। इसके बाद एक के बाद एक दूसरे टेंट कारोबारियों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने लगीं। पड़ताल हुई तो पता चला कि अलग-अलग टेंट हाउस से सामान लिया गया था और उसके बाद वह वापस नहीं आया। इसी दौरान करीब 9 लाख रुपये के सामान की ठगी का मामला सामने आया।

शिकायत थाने पहुंची तो पुलिस ने कसा शिकंजा

ठगी से परेशान टेंट कारोबारी पुलिस के पास पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने सुमित और अमित को गिरफ्तार कर लिया। अब दोनों से पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

5 किलोमीटर के दायरे में बना ठगी का जाल

पुलिस की जांच में यह बात भी सामने लाने की कोशिश की जा रही है कि करीब 5 किलोमीटर के इलाके में कितने टेंट कारोबारी इस कथित ठगी का शिकार हुए। कितने टेंट हाउस से सामान लिया गया, कुल कितना सामान कबाड़ में बेचा गया और उससे कितनी रकम हासिल की गई, इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की पूछताछ में तलाशे जा रहे हैं।

चाचा-भतीजे अकेले थे या पीछे कोई और चेहरा?

मामले में अब एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या इस कथित ठगी को चाचा-भतीजे ने अकेले अंजाम दिया या उनके साथ कोई और भी जुड़ा था। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कबाड़ में सामान किसे बेचा गया और इस सामान को ठिकाने लगाने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही या नहीं।

पुलिस खोलेगी पुरानी वारदातों की फाइल

गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड और उनकी गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है। जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ रही है कि कहीं पहले भी शादी, भंडारे या दूसरे कार्यक्रमों के नाम पर टेंट कारोबारियों से इसी तरह सामान तो नहीं लिया गया। फिलहाल पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि 9 लाख रुपये के कथित खेल में कितने कारोबारी फंसे, कितना सामान गायब हुआ और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कितने लोग हैं।

कानपुर से अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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