बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने महिला मतदाताओं से निजी लाभ वाले लुभावने वादों और घोषणाओं से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे हथकंडों के जरिए चुनावों को अनुचित तरीके से प्रभावित किया जाता है। मायावती का यह बयान हाल ही में समाजवादी पार्टी की उस घोषणा के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें गरीब और वंचित महिलाओं के खाते में हर साल सीधे 40,000 रुपये देने, मुफ्त लैपटॉप, साइकिल और मोबाइल फोन उपलब्ध कराने का वादा किया गया है।
उम्मीदवारों के चयन की समीक्षा
मायावती ने उत्तर प्रदेश की मंडल इकाइयों और सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों समेत वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में उन्होंने पार्टी उम्मीदवारों के चयन की प्रगति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बसपा प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे विरोधी दलों के खुलेआम छलावे और विश्वासघात के बारे में जनता को आगाह करें, ताकि मतदाता स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से मतदान कर सकें।
'जेन-जी' और 'जेन-अल्फा' युवाओं पर क्या कहा?
मायावती ने कहा, "देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव के बाद सरकार बनने पर लगातार हो रही वादाखिलाफी, विश्वासघात और जनहित एवं जनकल्याण के प्रति गैर-जिम्मेदारी के खिलाफ बसपा के संघर्ष के साथ-साथ 'जेन-जी' और 'जेन-अल्फा' पीढ़ी के युवाओं को भी ऐसे जनविरोधी रवैये और गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठानी पड़ रही है। इसके कारण उन्हें पुलिस मामलों और अन्य सरकारी दमन का सामना करना पड़ रहा है।"
बीजेपी सरकार की नीतियों पर निशाना
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और पलायन से उत्तर प्रदेश की जनता परेशान है और सरकार की घोषणाएं 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रही हैं। इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री ने बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर 09 अक्टूबर को लखनऊ के 'मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल' में आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम को पूरी निष्ठा के साथ संपन्न कराने के निर्देश दिए।
नेपाल बाढ़ और यूपी की स्थिति पर संवेदना
पड़ोसी देश नेपाल में आई भीषण बाढ़ से हुए जान-माल के नुकसान पर मायावती ने गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद के लिए तत्काल आगे आएं, अन्यथा पूर्वांचल के लोगों का जीवन और अधिक कठिन हो जाएगा। इससे पहले मायावती ने ऐलान किया था कि बसपा पंजाब विधानसभा चुनाव बिना किसी गठबंधन के अपने दम पर लड़ेगी।
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