कहां और कैसे होगी बकरीद की नमाज? CM योगी के आदेश के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं ने किया ऐलान, जानिए क्या कहा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुले में नमाज अदा करने पर सख्त पाबंदी लगाई है। ऐसे में अब पहले से ही मुस्लिम घर्मगुरुओं ने ऐलान कर दिया है कि किन जगहों और कैसे सामूहिक तौर पर ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की जा सकती है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने पर सख्त पाबंदी लगाई है। सीएम योगी की हालिया टिप्पणी के बाद शुरू हुई बहस के बीच कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बताया कि ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज कहां-कहां होगी। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इसका ऐलान पहले से कर दिया है। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा कि पहले की तरह इस बार भी मस्जिदों और ईदगाहों में ही नमाज अदा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अलग-अलग पालियों में नमाज की व्यवस्था भी की जा सकती है।
जानिए खुले में नमाज को लेकर सीएम योगी का आदेश
सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में लखनऊ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि यदि नमाज पढ़ना आवश्यक है तो इसे मस्जिदों के भीतर अदा किया जाए। सार्वजनिक स्थानों पर नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि यदि भीड़ अधिक हो तो अलग-अलग 'पालियों' में नमाज पढ़ी जा सकती है। सीएम ने कहा था, 'अगर नमाज पढ़ना जरूरी है तो अलग-अलग पालियों में पढ़िए। हम आपको नमाज पढ़ने से नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़कों पर इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।'
मस्जिदों और ईदगाहों में चल रही तैयारियां
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि 28 मई को होने वाली ईद-उल-अजहा के लिए प्रत्येक साल की तरह इस बार भी मस्जिदों और ईदगाहों में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
नमाज केवल इबादत नहीं बल्कि अनुशासन सिखाती है
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अलग-अलग इमामों के नेतृत्व में अलग-अलग समय पर नमाज अदा कराने की व्यवस्था की जा सकती है। महली ने कहा कि मुसलमान सालों से मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करते आ रहे हैं। हमेशा कानून-व्यवस्था का पालन करते रहे हैं क्योंकि नमाज केवल इबादत ही नहीं बल्कि अनुशासन भी सिखाती है। उन्होंने कहा कि सालों से सड़कों पर नमाज से परहेज कर मुसलमानों ने यह साबित किया है कि वे एक अनुशासित और सभ्य समुदाय के सदस्य हैं।
सरकार सभी समुदायों पर लागू करे नियम- मौलाना रशीद
सीएम की टिप्पणी पर मौलाना खालिद रशीद ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि सरकार सभी समुदायों पर समान नियम लागू करेगी। आदर्श स्थिति यही होगी कि कोई भी समुदाय सड़कों पर जुलूस या धार्मिक आयोजन न करे।'
अलग-अलग 'पालियों' में अदा करने का प्रावधान नहीं
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि इस साल भी शिया मस्जिदों में ईद की नमाज की तैयारियां हर साल की तरह की जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शिया परंपरा में सामूहिक नमाज अलग-अलग 'पालियों' में अदा करने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा, 'सामूहिक नमाज पालियों में नहीं होती।'
इबादत को नहीं बनाया जाना चाहिए निशाना
योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी पर अब्बास ने कहा, 'यह इबादत का मामला है और केवल एक प्रकार की इबादत को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। कोई भी जुलूस या धार्मिक गतिविधि जो यातायात बाधित करे, उसे रोका जाना चाहिए।'
साफ-सुथरे और शांत स्थानों पर अदा की जाए नमाज
इस बीच, बरेलवी संप्रदाय के प्रमुख धर्मगुरुओं ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि नमाज केवल साफ-सुथरे और शांत स्थानों पर ही अदा की जानी चाहिए, जहां किसी प्रकार की बाधा न हो। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि इस्लाम में नमाज के दौरान इबादत करने वाले और अल्लाह के बीच किसी तरह की रुकावट नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की शांति और एकाग्रता सड़कों या चौराहों पर संभव नहीं है, बल्कि मस्जिदों या घरों में ही हासिल की जा सकती है।
सीएम के आदेश का होगा पालन- बरेली के मौलाना खुर्शीद
रजवी ने कहा कि इस्लामी कानून के तहत ईद-उल-फितर या ईद-उल-अजहा के अवसर पर भीड़ अधिक होने पर एक ही मस्जिद में अलग-अलग इमामों के नेतृत्व में कई जमातें आयोजित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर बरेली में भी ऐसी व्यवस्था की जा सकती है। बरेली की जामा मस्जिद के इमाम मौलाना खुर्शीद ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सड़कों पर नमाज का विरोध कर कुछ गलत नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि इस निर्देश का पहले भी पालन किया जाता रहा है और आगे भी किया जाएगा।
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