समाजवादी पार्टी ने कानपुर में अपनी सहयोगी इकाई लोहिया वाहिनी के जिला अध्यक्ष पद पर ऐसे नेता की नियुक्ति की है, जिसके खिलाफ साल 2023 में महिला से छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज हुआ था। ऐसे में समाजवादी पार्टी की ओर से अमर सिंह यादव को लोहिया वाहिनी का ग्रामीण जिला अध्यक्ष बनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इतना ही नहीं भीतरखाने से ये भी आवाज उठाने लगी है कि इस मनोनयन से स्वयं सपा के कई वरिष्ठ नेता और अन्य सपा की इकाइयों के लोग भी खफा हैं।
इंडिया टीवी के पास है एफआईआर की कॉपी
इंडिया टीवी के पास उपलब्ध एक्सक्लुसिव एफआईआर कॉपी के अनुसार 27 मार्च 2023 को कानपुर के नौबस्ता थाना में एफआईआर संख्या 0155/2023 दर्ज की गई थी। इस मुकदमे में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) तथा धारा 506 (आपराधिक धमकी) लगाई गई थीं। एफआईआर में शिकायतकर्ता युवती ने आरोप लगाया था कि 27 मार्च 2023 की दोपहर वह एक धार्मिक स्थल पर प्रसाद चढ़ाने गई थी। वापस लौटते समय रास्ते में अमर सिंह यादव ने उसे रोक लिया। आरोप है कि आरोपी ने उसका हाथ पकड़कर जबरन अपनी ओर खींचा, उसे कसकर पकड़ लिया, गलत नीयत से उसके शरीर को छुआ और जबरदस्ती करने का प्रयास किया। विरोध करने और शोर मचाने पर आरोपी ने कथित रूप से उसे छोड़ दिया और किसी को घटना बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी।
घटना के तीन साल बाद ही सपा ने दे दिया पार्टी में पद
अब लगभग तीन वर्ष बाद समाजवादी पार्टी ने उसी अमर सिंह यादव को समाजवादी लोहिया वाहिनी, कानपुर का ग्रामीण जिला अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। नियुक्ति के बाद विपक्षी दलों और राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं कि महिला से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर चुके व्यक्ति को संगठन में इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों दी गई। इन आरोपों के बाद ऐसे में कहीं न कहीं आगामी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर महिलाओं और युवतियों को भी समाजवादी पार्टी को घेरने का मौका मिल गया है ।
इंडिया टीवी ने की अमर सिंह से बात
जब इंडिया टीवी ने नवनियुक्त लोहिया वाहिनी जिलाध्यक्ष अमर सिंह यादव से फोन पर बात की तो अमर सिंह ने बताया कि उन्हें साजिश के तहत झूठे मुकदमों में फंसाया गया है। अमर सिंह ने आरोप लगाया कि सत्तादल भाजपा के नेताओं की ओर से उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया गया, जिसमे मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसके साथ ही नवनियुक्त जिलाध्यक्ष ने ये भी आरोप लगाया कि संगठन की ओर से उन्हें दी गई जिम्मेदारी से उनकी ही पार्टी के कुछ लोग निराश हैं, क्योंकि वो स्वयं भी इस पद के दावेदार थे, लेकिन संगठन ने उन्हें दायित्व सौंपा जिसके बाद विरोधी सक्रिय होकर ऐसी हरकत कर रहे हैं।
कानपुर से संवाददाता अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट
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