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कानपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकला परिवार लापता, नेपाल-तिब्बत सीमा पर टूटा संपर्क, परिजनों ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच कानपुर के एक ही परिवार के तीन सदस्य लापता हो गए हैं। इस बीच परिजनों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

कानपुर से कैलाश मानसरोवर पर निकला परिवार लापता।- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT कानपुर से कैलाश मानसरोवर पर निकला परिवार लापता।

कानपुर: नेपाल और तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कानपुर के एक ही परिवार के तीन सदस्यों का संपर्क टूट गया है। 25 अगस्त की शाम से तीनों का कोई पता नहीं चल सका है। करीब चार दिन बीत जाने के बाद भी परिजनों को उनकी कोई जानकारी नहीं मिली है, जिससे कानपुर में परिवार के बीच चिंता और भय का माहौल है। लापता लोगों में अमेरिका में रहने वाले पंकज मिश्रा, उनकी पत्नी की बहन रागनी मिश्रा और परिवार की सदस्य पूनम मिश्रा शामिल हैं। तीनों कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए थे। 

बताया जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पहुंचने के बाद उनसे संपर्क पूरी तरह टूट गया, जिसके बाद परिवार में भय और गम का माहौल है। सभी अपने अपनो की सकुशल वापसी की राह देख रहे हैं। परिजनों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। परिवार की मांग है कि सीमावर्ती क्षेत्र में राहत एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से तीनों की तलाश कर जल्द से जल्द उनकी जानकारी जुटाई जाए।

18 अगस्त को निकले थे यात्रा पर

कानपुर के पीरोड निवासी प्रवीन द्विवेदी ने बताया कि उनके जीजा पंकज मिश्रा, बड़ी बहन रागनी मिश्रा और पूनम मिश्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए निकले थे। परिजनों के अनुसार, यात्रा का सिलसिला 18 अगस्त से शुरू हुआ। तीनों 19 अगस्त को दिल्ली पहुंचे और इसके बाद 20 अगस्त को काठमांडू पहुंचे। नेपाल की राजधानी में पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन करने के बाद उन्होंने कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू की। बताया गया कि यात्रा के दौरान उन्हें करीब तीन दिन की यात्रा और लगभग 52 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना था। 

प्रवीन द्विवेदी के मुताबिक, 25 अगस्त की शाम करीब 4:30 बजे उनकी परिवार के सदस्यों से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। बातचीत के दौरान तीनों ने बताया था कि वे तिब्बत बॉर्डर पार कर रहे हैं। परिजनों को उस समय तक किसी अनहोनी का अंदेशा नहीं था। लेकिन इसके कुछ घंटों बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। रात करीब 8 बजे जब परिवार ने दोबारा फोन से संपर्क करने का प्रयास किया तो कॉल नहीं लगी। इसके बाद लगातार फोन मिलाने और अन्य माध्यमों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। उस आखिरी वीडियो कॉल के बाद से परिवार को अपनों की आवाज तक सुनाई नहीं दी है।

बाढ़ और भूस्खलन की खबरों ने बढ़ाई चिंता

जिस क्षेत्र में तीनों यात्रा कर रहे थे, वहां प्राकृतिक आपदा की स्थिति की खबरों ने कानपुर में मौजूद परिजनों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। नेपाल और सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर संपर्क और आवागमन प्रभावित होने की बात सामने आई है। परिजनों का कहना है कि संपर्क टूटने के बाद से हर गुजरता दिन उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है। मोबाइल फोन पर कॉल करते हुए लगातार यही उम्मीद रहती है कि शायद दूसरी तरफ से कोई आवाज सुनाई दे जाए। लेकिन चार दिन बीतने के बाद भी कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका।

प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

परिवार ने अधिकारियों से सीमावर्ती क्षेत्र में तीनों भारतीय यात्रियों का पता लगाने के लिए तत्काल मदद की मांग की है। परिजनों के मुताबिक, प्रशासनिक स्तर पर उन्हें आश्वासन दिया गया है कि जैसे ही कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त होगी, परिवार को अवगत कराया जाएगा। फिलहाल संबंधित एजेंसियों के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क स्थापित करने और यात्रियों के संबंध में जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। परिजनों ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। (इनपुट- अनुराग श्रीवास्तव)

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