उत्तर प्रदेश के मेरठ के शारदा रोड पर 6 सितंबर को एक बड़ा हादसा सामने हुआ। तेज बारिश के बीच एक पुराना और जर्जर मकान अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। मकान गिरते ही जोर की आवाज हुई, जिससे आसपास के बाजार और इलाके में हड़कंप मच गया। हादसे के वक्त मकान का भारी-भरकम मलबा ठीक सड़क किनारे खड़ी एक कार पर जा गिरा, जिससे गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
टला बड़ा हादसा
जिस कार पर मलबा गिरा, वह दिल्ली के व्यापारी नीमेष गुप्ता की थी। राहत की बात यह रही कि जिस समय मकान गिरा, उस वक्त कार के अंदर कोई मौजूद नहीं था। साथ ही, रास्ते से गुजर रहे लोग भी मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। अगर गाड़ी में लोग मौजूद होते, तो एक बड़ी जनहानि हो सकती थी। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी बुलाई और मलबे को हटवाकर रास्ता साफ कराया।
नाला निर्माण से कमजोर हुई नींव?
यह जर्जर मकान दिल्ली चुंगी के रहने वाले सोहन लाल गोयल का है। मकान की खस्ता हालत को देखते हुए इसे बहुत पहले ही खाली करा दिया गया था। मकान मालिक का आरोप है कि नगर निगम द्वारा 'सीएम ग्रिड योजना' के तहत सड़क किनारे नाले का निर्माण कराया जा रहा था। नाला बनाने के लिए मकान की नींव के बेहद करीब खुदाई की गई, जिससे इमारत की दीवारें तिरछी हो गईं और उनमें बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं। लगातार बारिश के कारण दीवारें पानी सोखकर और कमजोर हो गईं, जिससे यह हादसा हुआ।
मकान मालिक ने DM को दी थी लिखित शिकायत
मकान मालिक का दावा है कि उन्होंने हादसे का अंदेशा जताते हुए पहले ही जिलाधिकारी (DM), सीनियर पुलिस अधिकारी (SSP) और नगर निगम को लिखित शिकायत दी थी। उन्होंने मुआवजे और समय रहते जरूरी कदम उठाने की मांग की थी, लेकिन अफसरों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके अलावा, भवन स्वामी ने यह भी खुलासा किया कि मकान के ग्राउंड फ्लोर की दुकान पर एक किरायेदार का कब्जा है। दुकान खाली न होने की वजह से वे खुद भी इस खतरनाक इमारत को तुड़वा नहीं पा रहे थे। प्रशासन की लापरवाही और किरायेदार की जिद के कारण आखिर वही हुआ जिसका डर था।
यह भी पढ़ें:
यूपी के सीतापुर में रविवार को करंट लगने से पिता और बेटे की मौत, घर में पसरा मातम
यूपी के संभल में दर्दनाक सड़क हादसा, ऑटो-डंपर की टक्कर में 2 बच्चों समेत 5 की मौत, 6 घायल