6 साल बाद मिला विकास दुबे की मौत का "सरकारी सबूत" पिता के नाम की एक गलती ने रोका था डेथ सर्टिफिकेट
विकास दुबे की मौत का "सरकारी सबूत" आखिरकार मिल गया है। करीब छह साल बाद ये सरकारी दस्तावेज मिला है। दरअसल उसके पिता के नाम में हल्की सी गलती हो गई थी, जिसकी वजह से मामला अटका हुआ था।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में बिकरू कांड के मुख्य आरोपी और कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे की मौत के करीब छह साल बाद आखिरकार उसका डेथ सर्टिफिकेट जारी हो गया। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कानपुर नगर निगम ने 11 सितंबर 2026 को विकास दुबे पुत्र रामकुमार के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। पोस्टमार्टम दस्तावेजों में पिता का नाम रामकुमार की जगह राजकुमार दर्ज होने के कारण प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी थी। अब सही नाम के साथ प्रमाण पत्र जारी होने के बाद परिवार की ओर से लंबित विरासत और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पिता का नाम बना सबसे बड़ी अड़चन
विकास दुबे की मौत के बाद तैयार किए गए पोस्टमार्टम दस्तावेजों में उसके पिता का नाम रामकुमार के बजाय राजकुमार दर्ज हो गया था। इसी नाम की विसंगति के कारण मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहा था। रिचा दुबे का कहना है कि उन्होंने इस गलती को ठीक कराने और डेथ सर्टिफिकेट जारी कराने के लिए नगर निगम, पोस्टमार्टम हाउस, स्वास्थ्य विभाग और जिलाधिकारी कार्यालय समेत कई स्तरों पर शिकायतें कीं, लेकिन लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकला।
दफ्तरों के चक्कर से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयासों के बावजूद समस्या दूर नहीं हुई तो रिचा दुबे ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को पक्षकार बनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद संबंधित विभाग सक्रिय हुए और पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई। इसके बाद पोस्टमार्टम दस्तावेजों समेत दूसरे सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कराया गया।
हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अफसरों ने खंगाला रिकॉर्ड
मामले में कार्रवाई के दौरान सीएमओ हरिदत्त नेमी के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर संबंधित दस्तावेजों की जांच करने की बात सामने आई। रिकॉर्ड में दर्ज नामों का मिलान और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद नगर निगम ने विकास दुबे के नाम और उसके पिता के सही नाम के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। रिचा के मुताबिक, 11 सितंबर को जारी प्रमाण पत्र अधिकारियों ने हाईकोर्ट में भी दाखिल कर दिया है।
रिचा बोलीं- छोटी सी गलती ने छह साल तक झुलाया
डेथ सर्टिफिकेट जारी होने के बाद रिचा दुबे ने एक वीडियो जारी कर अपने छह साल के संघर्ष का जिक्र किया। करीब 1 मिनट 53 सेकंड के वीडियो में उन्होंने दावा किया कि सरकारी दस्तावेज में हुई नाम की गलती ने परिवार को लंबे समय तक परेशान किया। उनके मुताबिक, इस दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ी और जीविकोपार्जन से जुड़ी परेशानियां बढ़ती गईं।
न रहने को घर था, न खाने को रोटी
रिचा दुबे ने दावा किया कि डेथ सर्टिफिकेट नहीं होने के कारण परिवार को बैंक खातों और संपत्ति से जुड़े मामलों में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि आर्थिक संसाधन खत्म होते गए और परिवार के सामने रहने तथा खाने तक की समस्या खड़ी हो गई। रिचा ने न्यायपालिका का धन्यवाद करते हुए कहा कि छह साल के संघर्ष के बाद उनकी बात सुनी गई और उन्हें राहत मिली।
डेथ सर्टिफिकेट के बिना अटकी थी वरासत
विकास दुबे की मौत के बाद उसकी पत्नी और दो बेटों के नाम वरासत की प्रक्रिया में भी मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण अड़चनें आने की बात कही गई थी। परिवार के मुताबिक, प्रमाण पत्र जारी होने के बाद अब संपत्ति और वरासत से जुड़ी लंबित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होना इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण दस्तावेजी कड़ी माना जा रहा है।
बिकरू कांड में 8 पुलिसकर्मियों की हुई थी हत्या
विकास दुबे का नाम 2/3 जुलाई 2020 की रात कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में हुए पुलिस टीम पर हमले के बाद देशभर में चर्चा में आया था। पुलिस टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए दबिश देने पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया, जिसमें तत्कालीन डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। घटना के बाद विकास दुबे फरार हो गया था और उसकी तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी गई थी।
उज्जैन में गिरफ्तारी के बाद कानपुर लाते समय हुई मौत
लगातार तलाश के बाद 9 जुलाई 2020 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास विकास दुबे को गिरफ्तार किया गया था। अगले दिन 10 जुलाई को उसे कानपुर लाया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, भौती के पास पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद विकास दुबे ने भागने की कोशिश की और पुलिस पर गोली चलाई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई।
छह साल बाद सरकारी रिकॉर्ड में पूरा हुआ मौत का दस्तावेज
अब सही नाम के साथ डेथ सर्टिफिकेट जारी होने के बाद विकास दुबे के परिवार के लिए वरासत, संपत्ति और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के आगे बढ़ने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। छह साल तक चली इस पूरी प्रक्रिया में परिवार की ओर से मुख्य अड़चन सरकारी दस्तावेजों में पिता के नाम की विसंगति को बताया गया। हाईकोर्ट में मामला पहुंचने और अदालत के हस्तक्षेप के बाद संबंधित विभागों ने रिकॉर्ड की जांच की और आखिरकार मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
कानपुर से अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट
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