Aloka Dog Viral Video: बौद्ध भिक्षुओं का एक समूह शांति को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में एक पदयात्रा कर रहा है। उनके साथ हर कदम पर 'अलोका' नाम की एक शांत फीमेल डॉग भी है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है। यह शांति पदयात्रा जॉर्जिया से गुजर रही है और रास्ते पर 'अलोका' भी सबका ध्यान खींच रही है। इसे सोशल मीडिया पर प्यार से 'शांति का कुत्ता' कहा जा रहा है। माथे पर दिल के आकार का निशान लिए 'अलोका' अक्सर भिक्षुओं के साथ चुपचाप चलती हुई दिखाई देती है, कभी-कभी आत्मविश्वास से आगे निकल जाती है।
भारत से शुरू हुई कहानी
फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, 'अलोका' की कहान भारत में शुरू हुई, जहां वह एक आवारा कुत्ते के रूप में रहती थी और एक शांति यात्रा के दौरान भिक्षुओं के साथ जुड़ गई। उनके साथ वफादारी से चलने और उन्हें छोड़ने से इन्कार करने के बाद, 'अलोका' उनकी यात्रा का एक स्थायी हिस्सा बन गई, और अब उसकी वफादारी अमेरिका भर में मीलों तक फैली हुई है।
2300 मील की पदयात्रा में छा गई अलोका
बताया जा रहा है कि, यह पदयात्रा 120 दिनों तक चलेगी और लगभग 2,300 मील की दूरी तय करेगी। इसमें बौद्ध भिक्षुओं का ग्रुप वाशिंगटन, डीसी की ओर बढ़ते हुए 10 राज्यों को कवर करेगा। जॉर्जिया के बाद, भिक्षुओं और 'अलोका' के जॉर्जिया के एथेंस से होकर या उसके पास से गुजरने की उम्मीद है। गौरतलब है कि, पीस वॉक ने डिजिटल जगत में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है, फेसबुक पर इसके 500,000 से अधिक फॉलोअर्स और इंस्टाग्राम पर 610,000 फॉलोअर्स हैं। अलोका के लिए एक समर्पित हैशटैग भी है, #AlokathePeaceDog।
ग्रुप ने शेयर की पोस्ट
इंस्टाग्राम पर walkforpeace.usa नामक हैंडल से एक पोस्ट शेयर की गई थी।
इसमें लिखा था कि, 'नए साल के पहले दिन एक मील का पत्थर! हमें यह बताते हुए अत्यंत खुशी और कृतज्ञता हो रही है कि वॉक फॉर पीस के हमारे फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज ने आज, 2026 के पहले दिन, 500,000 से अधिक फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है!' इस दौरान समूह को स्थानीय निवासियों से भरपूर प्रोत्साहन मिला है, और शांति का उनका संदेश ऑनलाइन भी काफी लोकप्रिय हुआ है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
ये भी पढ़ें -
भारत का इकलौता रेलवे स्टेशन, जहां से देश के कोने-कोने के लिए मिलती है ट्रेन; नाम सुनकर दिमाग घूम जाएगा
रेलवे ट्रैक से ट्रेन की पटरियां चोरी क्यों नहीं होतीं, चुराने से क्यों कांपते हैं चोर-उचक्के; सुनकर यकीन नहीं होगा