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माता-पिता के अमेरिका में 'वेलकम' के लिए बेटी ने 3620 दिन तक किया इंतजार, खुद की सेविंग्स से साकार किया सपना

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट इन दिनों काफी वायरल हो रही है। इस पोस्ट में बेटी ने बताया है कि, उसने माता-पिता के अमेरिका में स्वागत के लिए कुल 3620 दिन तक इंतजार किया।

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Image Source : LINKEDIN/@ANKITAMISHRA अमेरिका पहुंची फैमिली।

एक भारतीय महिला ने 3,620 दिनों से अधिक के इंतजार के बाद अपने माता-पिता का अमेरिका में स्वागत करने के भावुक क्षण को साझा किया है। सिएटल स्थित एटलासियन में वरिष्ठ उत्पाद प्रबंधक अंकिता मिश्रा ने लिंक्डइन पोस्ट में उस वादे को याद किया जो उन्होंने अमेरिका आने पर खुद से किया था कि एक दिन वह अपनी बचत से अपने माता-पिता को वहां लाएंगी। उस पोस्ट में उन्होंने एयरपोर्ट के आगमन टर्मिनल से एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह अपने परिवार के साथ एक तख्ती पकड़े हुए दिखाई दे रही हैं, जिस पर लिखा है, 'मैंने इसके लिए 3,620 से अधिक दिनों तक इंतजार किया' और 'अमेरिका में आपका स्वागत है, मॉम-डैड।' 

लिंक्डइन पोस्ट हुई वायरल 

इस पोस्ट को लिंक्डइन पर @AnkitaMishra नामक हैंडल से शेयर किया गया है। अपनी यात्रा को याद करते हुए अंकिता मिश्रा ने लिखा कि जब वह 20 साल की उम्र में अमेरिका गईं, तो उन्होंने खुद से एक मन ही मन वादा किया था। उन्होंने लिखा, 'एक दिन मैं अपने माता-पिता को अमेरिका लाने के लिए पर्याप्त पैसे बचा लूंगी। मुझे नहीं पता था कि कैसे और कब, बस इतना पता था कि मैं ऐसा करूंगी।' महिला ने बताया कि उन्होंने 2019 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की, लेकिन कोविड-19 महामारी और बाद में पारिवारिक शादियों के कारण अपने माता-पिता को विदेश लाने की उनकी योजना में देरी हो गई। उन्होंने लिखा, 'जिंदगी हमें इंतजार करने के लिए बहाने देती रही।'  आगे बताया कि अमेरिका में पहली बार कदम रखने से लेकर हवाई अड्डे पर अपने माता-पिता और ससुराल वालों का स्वागत करने तक 3,620 से अधिक दिन बीत गए। उन्होंने कहा, 'इस बार सबने मिलकर योजना बनाई और खर्च उठाया।'  

Image Source : Linkedin/@AnkitaMishra लिंक्डइन पर पोस्ट वायरल।

माता-पिता के संघर्ष को भी किया याद 

अपने माता-पिता के बलिदानों को याद करते हुए महिला ने बताया कि उनकी मां की शादी 19 साल की उम्र में हुई थी, जबकि उनके पिता ने कई वर्षों तक परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य के रूप में जीवन बिताया। उन्होंने लिखा, "मेरी मां की शादी 19 साल की उम्र में हुई थी। मेरे पिता कई वर्षों तक अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य रहे, हर एक रुपया बचाते रहे ताकि एक दिन उनकी बेटी भी ऐसा जीवन जी सके।" उन्होंने आगे कहा कि उनके द्वारा किए गए हर बलिदान का उद्देश्य उस क्षण तक पहुंचना था जब वह अंततः हवाई अड्डे पर उनका स्वागत कर सकीं। उन्होंने लिखा, "उनके द्वारा किए गए हर बलिदान का उद्देश्य यह था कि मैं हवाई अड्डे पर उनके लिए तख्ती लेकर खड़ी हो सकूं, न कि इसके विपरीत।" 

विदेश में जीवन के बारे में बताया

इसे एक प्रवासी की कहानी की टाइमलाइन बताते हुए महिला ने कहा कि विदेश में जीवन बनाना शायद ही कभी त्वरित या सीधा होता है। उन्होंने कहा, "यह एक सीधी रेखा में नहीं होता, न ही यह तेज़ होता है, बल्कि ईंट-दर-ईंट और वीज़ा-दर-वीज़ा बनता है, जब तक कि एक दिन आप फूलों और एक पोस्टर के साथ वहाँ खड़े नहीं होते जिस पर लिखा होता है 'अमेरिका में आपका स्वागत है, माता-पिता' और तब जाकर आपको इसका अर्थ समझ आता है।" उन्होंने आगे कहा, "हम यहां कई कारणों से इतनी मेहनत करते हैं, लेकिन अगर मैं सच कहूं तो सबसे बड़ा कारण यह है कि हम अपने माता-पिता को उस जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव करा सकें जिसके लिए उन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।"  

यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया 

इस पोस्ट ने लिंक्डइन के कई यूजर्स को प्रभावित किया, जिन्होंने इसी तरह के अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा, "यह बात मुझे बहुत छू गई। मेरे माता-पिता इस साल मेरे ग्रेजुएशन समारोह में शामिल होने के लिए पहली बार अमेरिका आए थे। उनकी यात्रा की योजना बनाने से ठीक पहले मेरी नौकरी चली गई। फिर भी, अपनी सारी बचत से मैंने उनकी फ्लाइट बुक की, उनके यात्रा और स्वास्थ्य बीमा का इंतजाम किया और यह सुनिश्चित किया कि वे वहां मौजूद रहें। उन्हें मुझे ग्रेजुएट होते देखना मेरे हर बलिदान के लायक था। कुछ उपलब्धियां वेतन से नहीं मापी जातीं। वे उन लोगों के चेहरों पर मुस्कान से मापी जाती हैं जिन्होंने सबसे पहले आप पर विश्वास किया।" 

दूसरे ने लिखा कि, "इस पोस्ट को पढ़कर मेरा दिल खुश हो गया क्योंकि लगभग एक महीने पहले मैंने भी कुछ ऐसा ही अनुभव किया था। सात साल घर से दूर रहकर, अपनी खुद की जिंदगी बनाने और अपने माता-पिता को उनके आने पर गर्व महसूस कराने की उम्मीद के बाद, वह पल बेहद खास लगा। इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है, लेकिन यह सचमुच एक खूबसूरत स्वीकृति की मुहर जैसा लगता है और मन को पूरी तरह से तरोताजा कर देता है।" 

तीसरे ने लिखा कि, "मैं इसे पूरी तरह समझ सकती हूं। मेरे माता-पिता आठ साल से अधिक समय तक अमेरिका में रहने के बाद मुझसे मिलने आए थे। अंकिता, मैं तुम्हारी खुशी और भावनाओं को समझ सकती हूं। जितना हो सके इस समय का आनंद लो।"

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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