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149 रुपये में महिलाओं को भी मिल रही ऐसी सुविधा, सुनते ही माथा पीट लेंगे आप; पति समाज में डर का माहौल

Viral Post : सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट ने इन दिनों यूजर्स का ध्यान आकर्षित किया है। इसमें शॉपिंग से जुड़ा एक दावा किया गया है।

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Image Source : X/@YESKHUSH_5 दिल्ली में महिला के चलता शॉपिंग असिस्टेंट।

Viral Post : दिल्ली का लाजपत नगर बाजार एक अनोखी सेवा के कारण वायरल हो रहा है। इसके तहत खरीदार बाजार में खरीदारी के दौरान अपना सामान उठाने के लिए किसी को किराए पर ले सकते हैं। X पर यूजर @YesKhush_5 द्वारा साझा की गई इस पोस्ट में एक महिला की तस्वीर है जो भीड़ भरे बाजार में एक ऐसे व्यक्ति के साथ चल रही है जिसने "CARRYMEN" लेबल वाली टी-शर्ट पहनी हुई है। 

एक्स पोस्ट हो रही वायरल 

इस पोस्ट के मुताबिक, यह सेवा केवल बैग उठाने से कहीं अधिक सुविधाएं प्रदान करती है। यूजर ने बताया कि ग्राहक बाज़ार में खरीदारी के दौरान सहायता के लिए 149 रुपये प्रति घंटे की दर से किसी व्यक्ति को किराए पर ले सकते हैं। शॉपिंग असिस्टेंट खरीदारी के बैग ले जा सकते हैं, खाने की कतारों में खड़े हो सकते हैं, ग्राहकों को मेट्रो स्टेशन तक ले जा सकते हैं, उन्हें बैठने की जगह ढूंढ़ने में मदद कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर फोल्डेबल कुर्सियों की व्यवस्था भी कर सकते हैं। तस्वीर को साझा करते हुए यूजर ने लिखा, "लाजपत में अब आप 149 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से अपना सामान उठाने, खाने की कतारों में इंतजार करने, मेट्रो तक ले जाने, बैठने की जगह ढूंढने और यहां तक ​​कि फोल्डिंग कुर्सी लगाने के लिए भी भुगतान कर सकते हैं। दिलचस्प धंधा है!!"

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस पोस्ट के वायरल होते ही कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने मजाक में कमेंट किया, "इसे शेयर मत करो यार, मम्मी को पता चला तो वो मेरी जगह ले लेंगी।" दूसरे ने लिखा कि, "मुझे यकीन नहीं है कि यह स्टार्टअप या मिलियन-डॉलर का विचार कहलाने लायक है या नहीं, और यह बिक भी सकता है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह संसाधनों का गलत उपयोग है और मानव शक्ति को गलत दिशा में धकेल रहा है!" आलोचना का जवाब देते हुए, यूजर ने अपने विचार का बचाव किया और कहा, "जो लोग इसे सस्ते श्रम का शोषण कह रहे हैं, वे दो बातों को मिला रहे हैं। शारीरिक श्रम शोषण नहीं है। कम वेतन वाला, असुरक्षित और अपमानजनक काम शोषण है। यदि सहायकों को उचित वेतन दिया जाए और उनके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाए, तो यह एक वास्तविक समस्या का समाधान करने वाली वैध सेवा है। श्रम की शर्तों की आलोचना करें, श्रम की नहीं।"  एक यूजर ने लिखा था, "यह व्यवसाय भारत में नहीं चलेगा क्योंकि यहाँ के लोग इतने गरीब हैं कि वे बेचारे सब्जीवाले और नौकरानी को भी नहीं रख सकते।" वहीं एक अन्य यूजर ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा, "मैंने पिताजी को इसके बारे में बताया तो उन्होंने कहा, 'कैरीमैन' क्या होता है, इसे तो 'पति' कहते हैं।"
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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