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'पांचवीं मंजिल से ऊपर घर ना खरीदें' नोएडा की बिल्डिंग में लगी आग पर छिड़ी बहस, जानिए क्या कह रहे लोग

Noida Fire Accident : सोशल मीडिया पर हाल ही में नोएडा की एक हाईराइज बिल्डिंग में लगी आग का वीडियो सामने आया था। इसे लेकर अब यूजर्स के बीच बहस छिड़ गई है।

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Image Source : X/@PUNSTERX नोएडा की हाईराज बिल्डिंग में लगी आग।

Noida Fire Accident : नोएडा स्थित एक अपार्टमेंट टावर की 12वीं मंजिल पर लगी आग ने भारत में तेजी से बन रही ऊंची इमारतों की सुरक्षा और ऐसी घटनाओं पर आपातकालीन सेवाओं की प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता के बारे में ऑनलाइन एक बहस छेड़ दी है। यह बहस तब और तेज हो गई जब एक यूज़र ने घटनास्थल से एक वीडियो साझा किया, जिसमें दावा किया गया कि अग्निशमन उपकरण इमारत की ऊपरी मंज़िलों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहे थे। यूजर ने भारत में ऊंची इमारतों में रहने से जुड़ी एक बड़ी चिंता को उजागर किया।

एक्स पर शेयर किया गया वीडियो 

इस वीडियो को एक्स पर @PunsterX नामक हैंडल से शेयर किया गया है। घटना के दृश्य साझा करते हुए यूजर ने लिखा, 'आग 12वीं मंजिल पर लगी है। दमकल पंप 5वीं-6वीं मंजिल तक पहुंच रहे हैं। इससे सीख मिलती है: भारत में कभी भी ऊंची इमारत में घर न खरीदें। अगर खरीदना ही पड़े तो भी पांचवीं मंजिल से ऊपर कभी भी घर न खरीदें।'  

क्या था पूरा मामला 

गौरतलब है कि, शुक्रवार तड़के करीब 7 बजे नोएडा के सेक्टर 75 स्थित एक रिहायशी सोसाइटी में आग लग गई। 28 मंजिला इमारत की 12वीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में आग फैल गई, जिससे घना काला धुआं हवा में फैल गया। निवासियों और आसपास मौजूद लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो आग की लपटों और चल रहे आपातकालीन बचाव अभियान को दिखाते हुए तेजी से वायरल हो गए। अधिकारियों ने आग पर काबू पा लिया और किसी के घायल होने या जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। हालांकि, इस घटना ने सोशल मीडिया पर कई यूजर्स को यह सवाल उठाने के लिए प्रेरित किया कि क्या भारतीय शहरों में बन रहे ऊंची हाईराइज इमारतों की बढ़ती संख्या के लिए मौजूदा अग्नि सुरक्षा ढांचा पर्याप्त है।

सोशल मीडिया पर क्या बोले यूजर्स 

जैसे ही यह पोस्ट ऑनलाइन वायरल हुई, यूजर्स ने आपातकालीन तैयारियों और भवन निर्माण संबंधी स्वीकृतियों के बारे में चिंताओं, आलोचनाओं और सुझावों से कमेंट सेक्शन को भर दिया। एक यूजर ने ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति देने के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया, जबकि आपातकालीन सेवाएं इतनी ऊंचाई पर प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हैं। यूजर ने लिखा, 'अगर दमकल कर्मियों के पास 12वीं मंजिल तक पहुंचने के संसाधन नहीं हैं... तो अधिकारी ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति क्यों दे रहे हैं... अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए... वे बिल्डरों की लॉबी के साथ मिलीभगत करके मानव जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।' दूसरे ने लिखा कि 'चीन के पास पहले से ही ऐसे अग्निशमन ड्रोन हैं जो ऊंची इमारतों में आग बुझाने में सक्षम हैं और हम यहां हैं, नागरिक ऊंची इमारतें बना रहे हैं और उसमें अपना पैसा लगा रहे हैं, लेकिन सरकार अभी भी पाषाण युग में जी रही है।' तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'आगे क्या होगा, क्या हर सोसाइटी को अपना फायर ब्रिगेड रखना होगा? रखरखाव का बोझ वहां रहने वाले लोगों पर होगा? आशा है कि वहां सभी लोग सुरक्षित और स्वस्थ होंगे।' एक यूजर ने कहा कि, 'अशिक्षित दमकलकर्मी। जब पानी पांचवीं मंजिल से ऊपर नहीं पहुंच रहा है तो उसे क्यों बर्बाद किया जा रहा है? आदर्श रूप से, दमकलकर्मी को आग से नीचे वाली मंजिल पर दौड़ना चाहिए। रस्सी की मदद से नली को ऊपर खींचकर फिर ऊपर वाली मंजिल पर पानी छिड़कना चाहिए।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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