Knowledge Facts : भारत की सड़कों पर दौड़ते पीले-हरे ऑटो रिक्शा हर किसी की नजरों में चढ़ जाते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बने इन तीन पहियों वाले वाहनों को देखकर क्या कभी आपने सोचा कि इनका रंग पीला और हरा ही क्यों होता है? क्या यह सिर्फ डिजाइन है या इसके पीछे कोई गहरा वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सरकारी नियम छिपा है ? आज हम आपको इसके बारे में ही बताने वाले हैं:
ऑटो के पीले रंग के पीछे वजह
चूंकि, पीला रंग उच्च दृश्यता (High Visibility) के लिए जाना जाता है और ट्रैफिक की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर पीला रंग सबसे ज्यादा नजर आता है। सुबह के धुंधलके, बारिश या धूल-धुंध में भी ड्राइवर और पैदल यात्री आसानी से ऑटो को पहचान सकते हैं। लोग मानते हैं कि, पीला रंग मानव आंख को सबसे तेजी से आकर्षित करता है जो दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करता है। यही वजह है कि स्कूल बसें, टैक्सी और कई पब्लिक वाहन भी पीले रंग के इस्तेमाल करते हैं।
ऑटो के हरे रंग के पीछे वजह
गौरतलब है कि, हरा रंग मुख्य रूप से पर्यावरण संरक्षण और सीएनजी ईंधन का प्रतीक है। 2000 के दशक की शुरुआत में दिल्ली समेत कई शहरों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए पेट्रोल-डीजल से सीएनजी पर स्विच किया गया। उस दौरान सरकार ने ऑटो के रंग बदलकर हरे करने का फैसला लिया। हरा रंग हरियाली, पर्यावरण मित्रता और स्वच्छ ईंधन का संदेश देता है। दिल्ली परिवहन विभाग के नियम के अनुसार सीएनजी ऑटो को पीला-हरा रंग अनिवार्य है, जबकि पुराने पेट्रोल वाले ऑटो अक्सर काले-पीले होते थे।
ऑटो का रंग काला क्यों होता है
भारत के कुछ राज्य मसलन- महाराष्ट्र, कर्नाटक में काले-पीले ऑटो अभी भी दिखते हैं। ये पेट्रोल/डीजल या मिश्रित ईंधन वाले होते हैं। वहीं बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर में हरा-पीला कॉम्बिनेशन सीएनजी का प्रतीक बन गया है। प्रत्येक राज्य का आरटीओ अलग-अलग रंग निर्धारित करता है। केंद्रीय स्तर पर कोई एक रंग नहीं है, इसलिए क्षेत्रीय विविधता दिखती है। कुछ राज्यों में राजनीतिक प्रभाव भी रहा-जैसे तमिलनाडु में पीला रंग द्रमुक पार्टी से जुड़ा माना जाता है।
हरे रंग के अपने फायदे
दरअसल, हरे रंग के अपने फायदे होते हैं। हरा रंग गर्मी को कम करने में मदद करता है। दिल्ली की 45 डिग्री वाली गर्मी में हरा छप्पर अंदर की गर्मी को नियंत्रित रखता है। साथ ही, यात्री आसानी से पहचान लेते हैं कि यह पर्यावरण अनुकूल वाहन है। ट्रैफिक पुलिस के लिए भी यह आसानी पैदा करता है। रंग से ही पता चल जाता है कि वाहन किस फ्यूल पर चलता है और नियमों का पालन कर रहा है या नहीं। अब इलेक्ट्रिक ऑटो भी इसी पीले-हरे कलर को अपना रहे हैं ताकि लोग उन्हें पारंपरिक ऑटो की तरह भरोसेमंद समझें।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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