'रिश्तेदारों को दिखाने के लिए ₹20 लाख खर्च न करें!' बेंगलुरु के CA ने भव्य शादियों को लेकर दी अहम सलाह, पोस्ट Viral
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट काफी वायरल हो रही है। इस पोस्ट में महिला ने लोगों को शादियों में फिजूलखर्ची न करने की सलाह दी है।

भारतीय समाज में शादी एक बड़ा उत्सव मानी जाती है, लेकिन क्या भव्यता के चक्कर में आर्थिक सुरक्षा को दांव पर लगाना सही है? बेंगलुरु की चार्टर्ड अकाउंटेंट मीनल गोयल ने इसी मुद्दे पर एक पोस्ट शेयर की, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। महिला ने साफ कहा, 'रिश्तेदारों को इंप्रेस करने के लिए ₹20 लाख खर्च न करें। खर्चों के विस्तृत विश्लेषण के माध्यम से उन्होंने बताया कि कैसे भोजन, आयोजन स्थल, सजावट, फोटोग्राफी, मनोरंजन और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च तेजी से बढ़ सकता है, और लोगों से आग्रह किया है कि वे शादी के दिन से आगे भी सोचें।
इंस्टाग्राम पर शेयर की गई पोस्ट
इस पोस्ट को इंस्टाग्राम पर @ca.meenalgoel नामक हैंडल से शेयर किया गया है। महिला ने बताया है कि कैसे 20 लाख रुपये का शादी का बजट सिर्फ दो दिनों में खत्म हो सकता है और इसका आर्थिक प्रभाव कहीं अधिक समय तक बना रह सकता है। महिला के अनुसार, 'लगभग 6 लाख रुपये भोजन पर, 5 लाख रुपये आयोजन स्थल पर, 3 लाख रुपये सजावट पर, फोटोग्राफी और मनोरंजन पर 2 लाख रुपये प्रत्येक खर्च होते हैं, जबकि शेष 2 लाख रुपये विविध खर्चों पर खर्च किए जाते हैं। इनमें से अधिकांश खर्च अल्पकालिक होते हैं। एक बार इवेंट समाप्त हो जाने पर, वेन्यू खाली कर दिया जाता है, भोजन कर लिया जाता है, सजावट हटा दी जाती है और मेहमान चले जाते हैं, लेकिन वित्तीय लागत बनी रहती है।'
'फाइनेंशियल सिक्योरिटी के बारे में सोचें'
बेंगलुरु की सीए के मुताबिक, 'शादी एक उत्सव है। इसे आर्थिक बोझ बनने की ज़रूरत नहीं है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जश्न मनाएं, यादें बनाएं और आर्थिक तनाव के बजाय आर्थिक शांति के साथ अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करें। सिर्फ शादी नहीं, बल्कि एक मजबूत वैवाहिक जीवन का निर्माण करें।' मीनल ने लोगों को यह सोचने के लिए प्रोत्साहित किया कि इतनी ही राशि, या उसका कुछ हिस्सा भी, लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी बनाने के लिए कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस पैसे का उपयोग घर के डाउन पेमेंट, इमरजेंसी सिक्योरिटी, इन्वेस्टमेंट या भविष्य की शिक्षा के खर्चों के लिए किया जा सकता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संदेश शादियों के जश्न के खिलाफ नहीं था। बल्कि, उन्होंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार जश्न मनाने और अनावश्यक वित्तीय दबाव के बिना वैवाहिक जीवन शुरू करने के महत्व पर जोर दिया। उनके अनुसार एक ही आयोजन पर अत्यधिक खर्च करने के बजाय मजबूत वैवाहिक संबंध बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर वायरल होने में देर नहीं लगी। उनकी पोस्ट ने तब से ऑनलाइन एक व्यापक बहस छेड़ दी है, जिसमें कई यूजर्स इस बात से सहमत हैं कि शादी में होने वाला अत्यधिक खर्च अक्सर व्यक्तिगत पसंद से ज़्यादा सामाजिक अपेक्षाओं से प्रेरित होता है। एक यूजर ने लिखा कि, 'यह कहने के लिए धन्यवाद। एक महिला से यह सुनना वाकई सराहनीय है। अगर ज्यादा लोग इस दृष्टिकोण को शेयर करें, तो कई मिडिल क्लास लड़कों और उनके परिवारों को महंगी शादियों के बोझ की इतनी चिंता नहीं करनी पड़ेगी। समाज को निश्चित रूप से ऐसी सोच रखने वाली और महिलाओं की जरूरत है।'
एक अन्य यूजर ने पोस्ट से असहमति जताते हुए लिखा, 'माफ कीजिए, लेकिन यह जीवन में एक बार होने वाली घटना है, मैं इसके लिए जितना भी खर्च करना पड़े, करूंगा।'
गौरतलब है कि, इससे पहले एक कपल ने शादी में लाखों खर्च करने की जगह फ्लैट खरीदकर उसी में शादी रचाई थी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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