लिथुआनिया की एक पर्यटक का वंदे भारत एक्सप्रेस का पहला अनुभव सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। उन्होंने प्लेटफॉर्म पर सामान रखने की होड़ को ‘हंगर गेम्स’ से तुलना की, लेकिन 10 घंटे की एसी यात्रा को हर पैसे के लायक बताया। उनका वीडियो देखकर लोग उनके ईमानदार अनुभव पर चर्चा कर रहे हैं। पर्यटक का नाम करिशा है। वे अपनी दोस्त क्रिस्टीना के साथ भारत घूम रही हैं। दोनों ने नौकरी छोड़कर एक महीने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों की खोजबीन का फैसला किया। वे 16 अक्टूबर को भारत पहुंचीं। दिल्ली से ऑटो और मेट्रो से शुरू करके आगरा और फिर जम्मू-कश्मीर की ओर बढ़ीं।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @karisha.vlogs हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में करिशा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़ी दिखती हैं। यात्री ट्रेन में चढ़ने और सामान रखने की कोशिश कर रहे होते हैं। भीड़ और सामान के लिए जगह तलाशने का मंजर देखकर वे हैरान रह गईं। कैप्शन में उन्होंने लिखा, “लोगों को सामान रखने की जगह तलाशते देखना हंगर गेम्स जैसा लगा। हमें भी संघर्ष करना पड़ा।” हंगर गेम्स फिल्म सीरीज में संघर्ष और प्रतिस्पर्धा का माहौल होता है, उसी से उन्होंने तुलना की। बावजूद इसके, उनका अनुभव सकारात्मक रहा। वंदे भारत के फर्स्ट एसी कोच में 10 घंटे की यात्रा के बाद उन्होंने कहा, “मैं कह सकती हूं कि यह हर पैसे के लायक था।”
नॉन एसी से सुरक्षित लगी वंदे भारत
उन्होंने एसी और नॉन-एसी ट्रेनों की तुलना भी की। उनके मुताबिक नॉन-एसी टिकट सिर्फ तीन यूरो सस्ता हो सकता है, लेकिन अगर विकल्प हो तो वे कभी नॉन-एसी में नहीं जाएंगी। वंदे भारत उन्हें काफी सुरक्षित लगा। करिशा और क्रिस्टीना की यात्रा सिर्फ घूमने की नहीं, बल्कि भारत को करीब से समझने की है। वे दिल्ली, आगरा से लेकर कश्मीर तक के अनुभव शेयर कर रही हैं। वंदे भारत जैसी ट्रेन में सफर उनके लिए नया अनुभव था। भीड़ के बावजूद साफ-सुथरा कोच, एसी सुविधा और सुरक्षित महसूस होना उन्हें पसंद आया।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर चर्चा छिड़ गई। कई यूजर्स ने कहा कि विदेशी पर्यटकों का नजरिया दिलचस्प होता है। कुछ ने प्लेटफॉर्म की भीड़ को स्वीकार करते हुए वंदे भारत की सुविधाओं और सुरक्षा की तारीफ की। कुछ ने लिखा कि भारतीय रेलवे का अनुभव हर विदेशी को चौंकाता है, लेकिन आधुनिक ट्रेनें जैसे वंदे भारत सफर को आरामदायक बना रही हैं। करिशा का अनुभव दोनों पहलुओं को छूता है। प्लेटफॉर्म पर संघर्ष को उन्होंने हंगर गेम्स कहा, लेकिन यात्रा को ‘वर्थ एवरी पेनी’ बताया। यह संतुलित नजरिया कई लोगों को भाया।सोशल मीडिया पर उनके वीडियो ने हजारों व्यूज हासिल किए। लोग उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं कि उन्होंने नौकरी छोड़कर भारत घूमने का फैसला किया। कुछ ने पूछा कि कश्मीर का अनुभव कैसा रहा।
कई विदेशी कर चुके तारीफ
विदेशी पर्यटक अक्सर भारतीय रेलवे के बारे में अपनी राय रखते हैं। कुछ भीड़ और अव्यवस्था की बात करते हैं, तो कुछ आधुनिकीकरण की तारीफ। वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की आधुनिक छवि का प्रतीक है। तेज रफ्तार, आरामदायक सीटें और बेहतर सुविधाएं इसे खास बनाती हैं। करिशा जैसे विदेशी यात्री जब इसकी तारीफ करते हैं तो देश की तरक्की साफ नजर आती है। भीड़ तो रहती है, लेकिन यात्रा का अनुभव बेहतर हो रहा है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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