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'ज्यादा सैलरी का मतलब बेहतर जीवन नहीं...' गुड़गांव के एक फाउंडर ने बताई मेट्रो सिटी में रहने की असली ​कीमत; Video

सोशल मीडिया पर एक वायरल हुए एक वीडियो इन दिनों यूजर्स को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया है। वीडियो में उन्होंने मेट्रो सिटी में रहने की असली ​कीमत बताई है।

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Image Source : IG/@DRSUNNYGARG फाउंडर डॉ. सनी गर्ग।

गुड़गांव स्थित एक कंपनी में फाउंडर सनी गर्ग ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर महानगरों में ऊंची सैलरी और वास्तविक जीवन स्तर के बीच के अंतर को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि महानगर में ज्यादा कमाई करने का मतलब यह नहीं कि जीवन भी उतना ही समृद्ध हो जाता है। समय के साथ इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। उनके मुताबिक लोगों को सुविधा, आवागमन और सबसे महत्वपूर्ण, अपने समय के लिए भी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो 

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @drsunnygarg नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस वीडियो में सनी गर्ग ने बताया, 'महानगर में रहने वाले लोग इस बात से जरूर सहमत होंगे कि महानगर में रहने का सबसे बड़ा खर्च सिर्फ किराया नहीं है। बल्कि किराए की वजह से पूरी लाइफस्टाइल ही महंगी हो जाती है।' उन्होंने गुड़गांव, मुंबई या बेंगलुरु में 1.5 लाख रुपये मासिक कमाने वाले व्यक्ति का उदाहरण दिया। शुरुआत में 30,000 से 40,000 रुपये का किराया संभालने लायक लगता है। लेकिन कैब, फ्यूल, पार्किंग, घरेलू मदद, चाइल्डकेयर, फूड डिलीवरी, वीकेंड आउटिंग और परिवार से मिलने के लिए फ्लाइट जैसे खर्च समीकरण को पूरी तरह बदल देते हैं।  

'​मेट्रो सिटी सिर्फ जगह का किराया नहीं वसूलता'

उन्होंने जोर देकर कहा, 'क्योंकि महानगर सिर्फ जगह का किराया नहीं वसूलता। वह आपके समय की कमी का भी किराया वसूलता है।'  सनी के अनुसार, लोग ऑफिस के करीब रहने के लिए ज्यादा किराया चुकाते हैं, समय न होने की वजह से खाना बनाने की बजाय बाहर ऑर्डर करते हैं या घरेलू मदद रखते हैं क्योंकि काम और बच्चों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है। टियर-2 शहरों से तुलना करते हुए गर्ग ने बताया कि वहां 80,000 से 90,000 रुपये कमाने वाला व्यक्ति कभी-कभी बड़ा घर, कम यात्रा समय, माता-पिता के करीब रहने और अनुपात में ज्यादा बचत का मजा ले सकता है। जबकि महानगर में 1.5 लाख कमाने वाले की स्थिति उतनी अच्छी नहीं होती।

'सिर्फ सैलरी पैकेज पर ध्यान न दें...'

उन्होंने यह भी साफ किया कि महानगर बुरा नहीं है। वे बोले कि, 'महानगर अवसर, नेटवर्क, ऊंची सैलरी और तेज करियर ग्रोथ देते हैं।' उन्होंने सलाह दी कि सिर्फ पैकेज पर ध्यान न दें, बल्कि देखें कि वह सैलरी वास्तव में कैसा जीवन खरीद पाती है। वीडियो शेयर करते हुए गर्ग ने लिखा, “अधिक सैलरी हमेशा समृद्ध जीवन का मतलब नहीं होती क्योंकि मेट्रो जीवन में सबसे महंगा बिल कभी-कभी आपके बैंक खाते से नहीं कटता; यह आपके कैलेंडर से कट जाता है।” उन्होंने लोगों से कहा कि "उन वेतनों से मिलने वाले जीवन" की तुलना करनी चाहिए।"

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी, जिन्होंने गर्ग की बात से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, "यह बात बिल्कुल सही है।" 

दूसरे ने टिप्पणी की, "मेट्रो में रहने के अपने कुछ छिपे हुए नुकसान भी होते हैं।" 

तीसरे ने कहा, "हां, मैं आपसे सहमत हूं।" 

जबकि एक अन्य ने कहा, "सुविधा का महत्व हमारी सोच से कहीं ज्यादा है।" 

गौरतलब है कि, इससे पहले दिल्ली के खान मार्केट और गुरुग्राम गैलेरिया मार्केट की तुलना पर बहस छिड़ चुकी है, जिस पर कई यूजर्स ने रिएक्ट किया था। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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