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जिस शहद को चाट-चाट कर खाते हैं आप, वह होता है मधुमक्खियों का 'जूठा'; जानिए इसे बनाने का पूरा प्रोसेस

How Honey Is Made: फूलों के नेक्टर से शहद बनाने का प्रोसेस बड़ा ही दिलचस्प है। इसमें फूलों से चूसकर रस लाने और फिर उसे विशेष प्रक्रिया के जरिए शहद में बदलने का काफी लंबा प्रोसेस है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Image Source : PEXELS (प्रतीकात्मक फोटो) शहद बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानिए।

Bees Honey Process: क्या आपको भी शहद खाना पसंद है। क्या आप भी सुबह-सुबह गर्म पानी में घोलकर शहद को लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शहद कैसे बनता है। मधुमक्खियां अपने छत्ते में शहद का निर्माण कैसे करती हैं। दरअसल, मधुमक्खियां फूलों से रस यानी नेक्टर को चूसकर उसे अपने पेट में जमा कर लेती हैं, जहां एंजाइम की सहायता से वह शहद में बदल जाता है। इस प्रक्रिया में मधुमक्खियां अपने खास पेट Honey Stomach में जमा मिश्रण को मुंह से बाहर निकालकर छ्त्ते में रखती हैं और फिर पंखों से हवा देकर उसका पानी सुखाती हैं, जिससे शहद गाढ़ा बन जाता है। आइए शहद निर्माण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानते हैं।

मधुमक्खियों के शहद बनाने की प्रक्रिया

फूलों का रस इकट्ठा करना: शहद बनाने के लिए सबसे पहले श्रमिक मधुमक्खियां फूलों तक जाती हैं और फूलों का मीठा रस चूसती हैं। मधुमक्खियां इसे अपने शरीर के विशेष स्थान 'शहद पेट' में 60 मिलीग्राम तक फूलों का रस जमा करती हैं।

रस से शहद में रूपांतरण: श्रमिक मधुमक्खियां छत्ते पर लौटकर, वे फूल के रस को दूसरी मधुमक्खियों को देती हैं, जो इसे बार-बार चबाती हैं। उनकी बॉडी के एंजाइम जैसे- Invertase, फूलों के रस को ग्लूकोज और फ्रुक्टोज में तोड़ देती हैं।

शहद को सुखाना: इसके बाद मधुमक्खियां, उस मिश्रण को पेट से मुंह के जरिए निकालकर छत्ते के कोठों में भरती हैं। इसके बाद वह अपने पंखों को तेजी से फड़फड़ाकर मिश्रण के पानी को सुखाती हैं, जिससे यह मिश्रण गाढ़ा हो जाता है।

छत्ते में सील करना: जब मिश्रण का पानी 17-20 फीसदी तक ही रह जाता है तो मधुमक्खियां उसे मोम से बंद कर देती हैं, जिससे उसमें खराबी ना आए।

गौरतलब है कि मधुमक्खियों को फूलों के रस से शहद तैयार करने में आमतौर पर 1 से 3 हफ्ते का वक्त लगता है। हालांकि, इस प्रक्रिया की अवधि फूलों की उपलब्धता और मौसम पर निर्भर होती है। अनुकूल हालातों में, एक छत्ते से हर महीने 3-4 बार भी शहद निकाला जा सकता है। आमतौर पर जो चीज किसी दूसरे की पहले से खाई हुई होती है उसे जूठा माना जाता है। शहद बनाते वक्त भी मधुमक्खियां सारा काम मुंह से ही करती हैं, उसे खाती हैं, चबाती हैं, इसलिए आम भाषा में इसे उनका जूठा कहा जाता है।

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