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'बेंगलुरु के इंदिरानगर के आगे पुराने यूरोपीय शहर भी फीके हैं...' शख्स ने खूबसूरती के साथ खूबियां भी गिनाईं

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी वायरल हो रही है। इस पोस्ट में एक शख्स ने बेंगलुरु के इंदिरानगर को पुराने यूरोपीय शहरों से भी खूबसूरत बताया है।

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Image Source : X/@BIASED_HUMAN बेंगलुरु के मोहल्ले की शख्स ने की तारीफ।

बेंगलुरु के ट्रैफिक और इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर अक्सर लोग बेंगलुरु को ट्रोल करते रहते हैं। हालांकि, कई बार लोग यहां के सकारात्मक पक्ष को ​भी दिखाते हैं और तारीफ करते हैं। कुछ इलाकों की लोग तारीफ करते हैं तो कुछ की खराब योजना और यातायात की समस्याओं के लिए आलोचना करते हैं। X पर हाल ही में एक पोस्ट ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है, जिसमें एक निवासी ने शहर को "एक विरोधाभास" बताया है और इस इंदिरानगर की खूबसूरती को पुराने यूरोपीय शहरों की खूबसूरती से बेहतर बताया। इसे पहले भी एक महिला ने बेंगलुरु को 'भारत का यूरोप' बताया था। 

X पोस्ट में गिनाईं इंदिरानगर की खूबियां 

इस पोस्ट को एक्स पर @biased_human नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसके कैप्शन में शख्स ने लिखा कि, 'बेंगलुरु विरोधाभासों से भरा शहर है। बारिश होते ही इस शहर के कुछ हिस्से झगड़ने की जगह बन जाते हैं (बेलंदूर, माफ कीजिएगा)। वहीं दूसरी ओर इंदिरा नगर है, जो किसी सुहावनी शाम में किसी पुराने यूरोपीय शहर को भी मात दे सकता है। 100 फीट रोड वह जगह है जहां शहर के निर्माण के सही तरीके के बारे में सोच-समझकर कदम रखा जाता है। 100 फीट रोड में कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी विशाल मॉल के ग्राउंड फ्लोर में आ गए हों। लेकिन यह मॉल नहीं है। यहां दोनों ओर शोरूम की कतारें लगी हैं। फुटपाथ चौड़े हैं और आप उन पर आराम से चल सकते हैं। पार्किंग की सुविधा है। सड़कें चौड़ी हैं।' 

बताया क्यों खास है इंदिरानगर 

शख्स ने अपनी पोस्ट में बताया कि, 'शाम के समय जब सूरज ढलने लगता है और सुनहरी रोशनी अनगिनत पेड़ों की पत्तियों पर पड़ती है, तो नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। स्टार्टअप कंपनियां बार, कैफे और रेस्टोरेंट के बगल में ही स्थित हैं। शाम को आपको सजे-धजे लोग तेज कदमों से चलते हुए किसी क्लब की ओर जाते नजर आएंगे। इंदिरा नगर की अपनी एक आत्मा है। एक आज़ाद पंछी जैसी आत्मा। एक ऐसी आत्मा जो मुस्कुराती है। एक ऐसी आत्मा जिसे बारिश पसंद है। लेकिन 100 फीट रोड से 100 मीटर दूर चलते ही सब कुछ शांत हो जाता है। घर वैसे ही बने हैं जैसे होने चाहिए। गाड़ियां बाहर खड़ी हैं। पर्याप्त पेड़, पर्याप्त हरियाली, पर्याप्त शांति कि आप भूल जाते हैं कि आप भारत की सिलिकॉन वैली के बीचोंबीच खड़े हैं।' 

यूजर्स ने दी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं 

इस पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली, जिसमें कई लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि बेंगलुरु के विभिन्न इलाकों में रहने वाले लोग बेहद अलग-अलग अनुभव प्रदान करते हैं। 

एक यूजर ने लिखा कि, 'यह सिर्फ बेंगलुरु की बात नहीं है। यह सभी भारतीय शहरों की बात है। यहां तक ​​कि दिल्ली के सबसे पॉश इलाकों में से एक चाणक्यपुरी में भी, आप पीछे की गलियों में जाएंगे तो चौंक जाएंगे।'  

दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'निस्संदेह, बेंगलुरु भारत का सबसे खूबसूरत शहर है, और मैं तो यहां पैदा भी नहीं हुआ और न ही यहां पला-बढ़ा हूं।'

हालांकि, कुछ अन्य लोगों ने इस तुलना से असहमति जताई। एक व्यक्ति ने कहा, 'मैं इंदिरानगर के सबसे खराब इलाकों में से एक में रहता हूं। यहां संकरी गलियां और अतिक्रमण हैं। मुझे 100 फीट रोड भी कुछ खास पसंद नहीं आया। महंगे ब्रांड पैसे के लायक नहीं हैं और वहां बहुत भीड़भाड़ हो जाती है। हमें यूरोप की नकल करने की जरूरत नहीं है। भारत में संस्कृति, विशिष्टता और स्वच्छता होनी चाहिए।' 

एक अन्य यूजर ने लिखा, 'इंदिरानगर को 1960 के दशक में चौड़ी मुख्य सड़कों और पार्कों के साथ डिजाइन किया गया था। शहर के कई अन्य हिस्से पुराने गांवों के विस्तार हैं, जहां जनसंख्या घनत्व कहीं अधिक है। यही अच्छे शहरी नियोजन का परिणाम है।' 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। 

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