भारत में डिजिटल पेमेंट का कल्चर दुनिया भर के पर्यटकों को हैरान कर रहा है। हाल ही में एक फ्रांसीसी महिला मणिका ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव शेयर किया, जिसमें उन्होंने भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और क्यूआर कोड सिस्टम की खूब तारीफ की। उनका वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वे कहती हैं कि स्ट्रीट फूड, चाय, ऑटो या छोटी दुकान—हर जगह बस क्यूआर कोड स्कैन करके पेमेंट हो जाता है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @experiencesacree.inde नामक हैंडल से शेयर किया गया है। मणिका एक कंटेंट क्रिएटर हैं, जो फ्रांसीसी यात्रियों को असली भारत दिखाने में मदद करती हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करते हुए बताया कि भारत आने से पहले उन्हें UPI के बारे में पता था, लेकिन इतने गहरे स्तर पर रोजमर्रा के छोटे-छोटे लेन-देन में इसका इस्तेमाल देखकर वे चौंक गईं। वे बोलीं कि, 'एक फ्रांसीसी महिला के रूप में मैंने कभी नहीं सोचा था कि भारत में लगभग हर चीज के लिए फोन से पेमेंट कर सकूंगी... और मेरा मतलब है हर जगह। स्ट्रीट फूड? बस क्यूआर कोड स्कैन करें। चाय? स्कैन करें। ऑटो? स्कैन करें। सड़क के बीच की छोटी दुकान भी? क्यूआर कोड। फ्रांस से आने के बाद यह सच में हैरान करने वाला था।'
'स्कैन-पे-डन'
उन्होंने आगे बताया कि सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि यह सिस्टम सिर्फ बड़े शहरों या महंगे रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है। सड़क किनारे की छोटी स्ट्रीट फूड स्टॉल, लोकल दुकानें, कैफे, रिक्शा और हर तरह के छोटे कारोबार में क्यूआर कोड दिख जाते हैं। 20 रुपये की चाय या स्नैक के लिए भी “स्कैन, पे, डन” का सिस्टम आसानी से काम करता है। मणिका ने लिखा, 'फ्रांस से आने पर यह रोजमर्रा का सांस्कृतिक फर्क था, जिसने मुझे सोचने पर मजबूर किया-‘वाह... मैंने सच में इसकी उम्मीद नहीं की थी।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर मणिका के वीडियो ने व्यापक चर्चा छेड़ दी। कई भारतीयों ने गर्व जताया। एक यूजर ने लिखा कि, 'विदेशी लोग कितने कम जानकार हैं। यह सब 10 साल से चल रहा है। मैंने चार साल से कैश को हाथ नहीं लगाया है। हम आपके देश के बारे में सब कुछ जानते हैं।' इस टिप्पणी का जवाब देते हुए महिला ने कहा, “मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि यात्रा करने से दिमाग खुलता है, खासकर तब जब हम इतनी जिज्ञासा के साथ यात्रा करते हैं कि यह समझ सकें कि किसी देश के बारे में हमारा अपना अनुभव उस देश के बारे में सब कुछ जानने के बराबर नहीं होता। पर्यटक दायरे” से बाहर यात्रा करने से लोगों को एक ही देश के भीतर विभिन्न वास्तविकताओं को खोजने में मदद मिल सकती है और जिज्ञासा, बारीकियों और कुछ ऐसा सीखने की संभावना” पैदा हो सकती है जो आप पहले से नहीं जानते थे।”
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'यूपीआई से रोज़मर्रा के भुगतान वाकई बेहद आसान हो गए हैं।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली वाकई बेहतरीन है।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'हां, मैं आपसे सहमत हूं।'
गौरतलब है कि, इससे पहले एक और विदेशी टूरिस्ट ने भारत के UPI सिस्टम पर हैरत जताई थी। उसने कहा था कि, 'दुनिया के कई देशों से सालों आगे है इंडिया।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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