'हर जगह वर्कलोड का प्रेशर है...' अमेरिका से भारत लौटी महिला को याद आया वहां का वर्क कल्चर; Video Viral
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक महिला का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इसमें उसने अमेरिका से मुंबई लौटने के बाद वहां के वर्क कल्चर पर प्रतिक्रिया दी है।

अमेरिका में लगभग एक दशक तक काम करने के बाद मुंबई लौटी एक भारतीय महिला का अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है और ये वीडियो काफी वायरल भी हो रहा है। परिणया नाम की महिला ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर बताया कि अमेरिका की कार्य संस्कृति के बारे में फैलाई जा रही कई धारणाएं गलत हैं। उन्होंने साफ कहा कि “ओवरवर्क किसी एक देश की समस्या नहीं है, यह हर जगह है।”
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @liftandnurture नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में परिणया ने लगभग नौ साल अमेरिका में कंसल्टेंट के रूप में काम किया। वीडियो में वे कहती हैं, “अमेरिका में 5 बजे लॉग ऑफ करने का मिथक अब खत्म होना चाहिए। लोग मानते हैं कि वहां की वर्क कल्चर 5 बजे खत्म हो जाती है। लेकिन मेरे लिए तो ऐसा कभी नहीं रहा।” उन्होंने बताया कि कई बार शाम 7 बजे भी मैनेजर से मैसेज आते थे, जिनमें पूछा जाता था कि ईमेल का जवाब क्यों नहीं दिया। उनके अनुसार यह अपवाद नहीं, बल्कि आम बात थी। वे कहती हैं कि अलग-अलग जॉब और कंपनियों में दबाव एक जैसा रहता है-हमेशा उपलब्ध रहने का दबाव।
'हसल कल्चर किसी भी सीमा पर नहीं रुकता'
परिणया ने यह भी साझा किया कि कई वर्क कॉल्स पर वे अकेली ब्राउन व्यक्ति होती थीं। कभी-कभी उन्हें लगता था कि उनकी ज्यादा जांच-पड़ताल हो रही है। फिर भी उनका मुख्य संदेश यह था कि हसल कल्चर किसी एक देश की सीमा में नहीं बंधा है। वे बोलीं कि, “यह किसी एक देश को बुरा बताने की बात नहीं है। सच्चाई यह है कि हसल कल्चर किसी भी सीमा पर नहीं रुकता।”
क्यों लौटना पड़ा मुंबई
अमेरिका में लंबे समय तक काम करने के बाद उन्होंने मानसिक शांति के लिए मुंबई लौटने का फैसला किया। एक दशक तक खुद को साबित करने और लगातार बढ़ती अपेक्षाओं के बाद उन्होंने इस सिस्टम से बाहर निकलने का विकल्प चुना।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो कई कामकाजी पेशेवरों को छू गया है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी-अपनी कहानियां शेयर कर रहे हैं। कुछ ने कहा कि भारत में भी ओवरटाइम और देर रात तक काम आम है, तो कुछ ने अमेरिका के अनुभवों को साझा किया। कई यूजर्स ने सहमति जताई कि वर्क-लाइफ बैलेंस की समस्या वैश्विक है।
एक यूजर ने लिखा कि, 'मैं जर्मनी में एक अमेरिकी कंपनी में काम करता हूं, और यहां काम का दबाव बहुत ज्यादा है। मुझे 9 घंटे का वेतन मिलता है, लेकिन मेरा काम कभी शाम 5 बजे खत्म नहीं होता। अवास्तविक लक्ष्य, अस्पष्ट अपेक्षाएं... और यह सिलसिला चलता रहता है। ज्यादातर दिन पूरे 9 घंटे कई कॉल अटेंड करने में ही निकल जाते हैं और मुझे शाम 5 बजे के बाद ही असल काम करना पड़ता है।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'मैं सहमत हूं। शाम 5 बजे लॉग ऑफ करना एक मिथक है। अमेरिका में भी।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'यह बात अमेरिका के लिए सच हो सकती है। कनाडा में अगर आप सुबह 8 बजे लॉग इन करते हैं, तो मैनेजर आपको शाम 4 बजे के बाद काम करने के लिए कह देता है। यह हर देश में नहीं है, अमेरिका और भारत में देर तक काम करने की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाता है।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'यार, तुम तो भारतीय हो। सच में, अमेरिका में काम करने के मामले में भारतीय ही मानक तय करते हैं। मैं अब तक 6 कंपनियों में काम कर चुका हूँ। भारतीयों में एक बात समान है कि वे देर रात तक काम करते हैं और वर्क-लाइफ बैलेंस (WLB) न होने से उन्हें कोई परेशानी नहीं होती। साथ ही, सांवला होना कोई रुकावट नहीं है, क्योंकि अमेरिका की ज़्यादातर कंपनियों में सांवले रंग के लोग बड़ी संख्या में होते हैं।'
पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'अगर आप सचमुच शाम 5 बजे काम खत्म करना चाहते हैं तो यूरोप चले जाइए। अगर आप ऑफिस में देर तक रुकते हैं तो यह माना जाता है कि आप समय पर काम पूरा नहीं कर सकते या समय का प्रबंधन नहीं कर सकते, और इसे एक समस्या के रूप में देखा जाता है न कि उन लोगों को महिमामंडित करने के रूप में जो अधिक घंटे काम करते हैं।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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