Russia Ukraine Interesting Facts: दुनिया भर के कई देश आजकल प्रदूषण और पर्यावरणीय बदलावों के कारण चिंता में हैं। भारत की बात करें तो यहां राजधानी दिल्ली समेत कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) चिंताजनक स्थिति में है। प्रदूषण के विभिन्न कारक और स्रोत हो सकते हैं मगर क्या आप जानते हैं कई सालों से युद्ध कर रहे रूस और यूक्रेन में कितना प्रदूषण है ? वहां का AQI कितना है ? भारत जैसे देशों में अकेले औद्योगिक क्षेत्रों से ही कई प्रकार की गैसों या कार्बन का उत्सर्जन हो जाता है मगर युद्ध मैदान में उतरे रूस और यूक्रेन में क्या हाल है ? आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे।
रूस और यूक्रेन में भारी प्रदूषण
कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारी प्रदूषण हुआ है। शुरुआती दो वर्षों में यहां लगभग 175 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होने का दावा किया जाता है। युद्ध के कारण वायु, जल और मिट्टी में भारी प्रदूषण हुआ है, जो जंगल की आग, सैन्य उपकरणों के चलने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे से उत्पन्न हुआ है।
रूस और यूक्रेन में प्रदूषण के कारण
कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि, युद्ध के पहले तीन सालों में लगभग 237 मिलियन टन कार्बन एमिशन हुआ। ऐसे में प्रदूषण के कई कारण हैं मगर यहां हम आपको कुछ प्रमुख कारणों से अवगत करा देते हैं:
- हमलों में खतरनाक रसायनों का रिसाव
- रसायनों और ईंधनों का बढ़ता उत्सर्जन
- रूस में जीवाश्म ईंधन पर भारी निर्भरता
- यूक्रेन में कारखानों के कारण औद्योगिक प्रदूषण
- खराब हो चुके औद्योगिक संयंत्र, जिनमें जहरीले कचरे के तालाब भी शामिल हैं
- युद्ध से काला सागर और आज़ोव सागर में तेल रिसाव
- युद्ध के कारण भूमि का खनन और बारूदी सुरंगों का बिछाना
- कृषि भूमि पर बारूदी सुरंगों के जमा होने से फसल उत्पादन पर प्रभाव
- युद्ध के दौरान वनों की कटाई और आग
रूस और यूक्रेन का AQI
अब हम आपको बताते हैं कि, रूस और यूक्रेन में AQI कितना है। aqi.in की रिपोर्ट के मुताबिक रूस में इस समय 48 AQI है जो कि अच्छी स्थिति है।
Image Source : aqi.inरूस में वायु गुणवत्ता सूचकांक।
वहीं, यूक्रेन में इस समय का AQI 61 है। यह AQI मध्यम प्रदूषण की स्थिति को दर्शाता है।
Image Source : aqi.inयूक्रेन में वायु गुणवत्ता सूचकांक।
गौरतलब है कि, रूस और यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच होने वाले पर्यावरणीय बदलावों को देखते हुए कई बार अंतरर्राष्ट्रीय मंचों पर चिंता जाहिर की जाती है और फिर उन पर अलग-अलग रिसर्च कर समाधान के रास्ते खोजे जाते हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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