जब कोई भारतीय विदेश में बसता है तो उसके लिए परिवार और घरेलू जीवन की परिभाषा ही बदल जाती है। हाल ही में एक भारतीय युवक ने भारत और नॉर्वे के घर-परिवार के माहौल पर दिलचस्प तुलना की है। उनका अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। उनकी पोस्ट ने कई नॉर्वेजियन घरों के शांत वातावरण की तुलना भारतीय घरों में होने वाली जीवंत बातचीत से की है।
एक्स पर शेयर की गई पोस्ट
इस पोस्ट को एक्स पर @turiyatman नामक हैंडल से शेयर किया गया है। पोस्ट में उन्होंने बताया कि कैसे एक नॉर्वेजियन परिवार के साथ समय बिताने से मौन के प्रति उनका दृष्टिकोण बदल गया। कैप्शन में लिखा था, 'कभी-कभी घर में सबसे तेज़ आवाज खामोशी की होती है। जब मैं पहली बार एक नॉर्वेजियन परिवार के साथ बैठा और 10 मिनट तक कोई नहीं बोला, तो मुझे लगा कुछ गड़बड़ है। अब मैं भारत में हूं! अगर पूरा घर एकदम शांत हो जाए, तो कोई न कोई ज़रूर पूछेगा- क्या हुआ? नॉर्वे में रहने से मुझे घर के माहौल के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला। भारत में हम बातें करके, एक-दूसरे का हालचाल पूछकर और हर छोटी सी खामोशी को भरकर प्यार जताते हैं। नॉर्वे में कभी-कभी प्यार बस साथ बैठने, कुछ न कहने और फिर भी पूरी तरह से घर जैसा महसूस करने में होता है। दोनों ही खूबसूरत हैं। मुझे बस इसे समझने के लिए समय चाहिए था। भारत में रिश्तेदारों से मिलने या मेहमान आने पर आपका अनुभव कैसा रहता है?'
'भारत के घरों में बातचीत और नॉर्वे में..'
इस पोस्ट में सुझाव दिया गया है कि जहां नॉर्वे के घरों में मौन अक्सर सुकून का एहसास होता है, वहीं भारतीय परिवार स्नेह व्यक्त करने के लिए बातचीत, नियमित संपर्क और निरंतर मेलजोल को प्राथमिकता देते हैं। किसी एक तरीके को दूसरे से बेहतर बताने के बजाय, यूजर ने निष्कर्ष निकाला कि प्रेम व्यक्त करने के दोनों तरीकों की अपनी-अपनी सुंदरता है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर कई यूजर्स की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने लिखा कि, 'मुझे लगता है कि हमें दोनों की जरूरत है, एक-दूसरे के साथ इतना सहज होना कि हम चुप रह सकें और अपना काम कर सकें, और साथ ही इतना सहज होना कि हम हमेशा एक-दूसरे के आसपास बिना नाराज हुए रह सकें।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'मुझे थोड़ी शांति बहुत पसंद आएगी।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'शोरगुल वाला, बहुत ज्यादा शोरगुल वाला, और मुझे यह पसंद है।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, "यह जानना दिलचस्प है। लेकिन भारत में, स्थिति बिल्कुल अलग है। अगर कोई व्यक्ति किसी बैठक या पारिवारिक समारोह में पांच मिनट भी चुप रहता है, तो हर कोई उसका आकलन करने लगता है। वे तुरंत मान लेते हैं कि कुछ गड़बड़ है या पूछते रहते हैं, 'क्या आप ठीक हैं? आप इतने चुप क्यों हैं?'"
पांचवें यूजर ने लिखा कि, 'दरअसल, आपको नॉर्वे का माहौल पसंद है।'
गौरतलब है कि, इससे पहले एक भारतीय लड़की ने दुबई जाने के पीछे की कुर्बानियां गिनाईं थीं। इसमें उसने फैमिली, खुशियों और अपनेपन के त्याग के बारे में बताया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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