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Lawyer और Advocate में क्या फर्क होता है? दोनों को एक समझने वाले अंतर जान लें

Interesting Facts: क्या आप भी उन लोगों में से एक हैं जो Lawyer और Advocate को एक ही समझते हैं? अगर ऐसा है तो फिर आपको बता दें कि आप गलत समझते आए हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि दोनों के बीच में क्या अंतर होता है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
Image Source : PEXELS प्रतीकात्मक फोटो

12वीं की परीक्षा पास करने के बाद लोग अलग-अलग प्रोफेशन में चले जाते हैं। कोई इंजीनियरिंग का रास्ता चुनता है तो कोई डॉक्टर बनने का फैसला लेता है। कोई पत्रकार बनने की तरफ आगे बढ़ता है तो कोई वकील बनने के लिए LLB करने का फैसला करता है। आपके भी ग्रुप में या फिर संपर्क में शायद कोई वकील होगा ही और आज हम आपको इसी प्रोफेशन से जुड़ी एक ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं जो आपको हैरान कर देगी। दरअसल कई सारे लोग ऐसे हैं जो Lawyer और Advocate को एक ही समझते हैं। शायद आप भी उन लोगों में से एक होंगे जो इन्हें एक ही समझते होंगे और आज आपकी यह गलतफहमी दूर हो जाएगी क्योंकि आज हम आपको यह बताएंगे कि एक Lawyer और एक Advocate में क्या अंतर होता है।

Lawyer और Advocate में क्या फर्क होता है?

आप अगर Lawyer और Advocate को एक ही समझते आए हैं तो फिर समय आ गया है कि आपकी यह गलतफहमी दूर की जाए और आपको इन दोनों शब्दों के बीच का अंतर बताया जाए। आपको बता दें कि Lawyer शब्द काफी सामान्य प्रकृति का है और इसका इस्तेमाल कानूनी पेशे से जुड़े किसी भी व्यक्ति को दर्शाने के लिए किया जाता है जिसमें सॉलिसिटर, बैरिस्टर और अटॉर्नी शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ Advocate एक योग्य व्यक्ति होता है जो अदालत में अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करता है और मामले की प्रकृति के आधार पर मुआवजे या रिहाई की पैरवी करता है।

आपको अगर आसान भाषा में बताया जाए तो कोई भी आदमी जिसके पास LLB की डिग्री है, वो Lawyer कहलाता है लेकिन एक Advocate वही आदमी होता है जो बार काउंसिल में पंजीकृत होता है और इसके लिए उसे 'ऑल इंडिया बार परीक्षा' पास करना होता है।

Lawyer अदालत में केस नहीं लड़ सकता

आपको बता दें कि एक Lawyer का काम और उसकी जिम्मेदारी अपने मुवक्किलों को कानूनी सलाह देना होता है। वो अदालत में जाकर उनका केस नहीं लड़ सकता है क्योंकि वो बार काउंसिल में पंजीकृत नहीं होते हैं। वहीं एक Advocate के पास कानूनी मामलों में व्यापक ज्ञान, अनुभव और कौशल होता है, इसलिए वे अदालत में जाकर अपने क्लाइंट का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं क्योंकि वो बार काउंसिल में पंजीकृत होते हैं।

नोट: इस आर्टिकल में दी गई सारी जानकारी अलग-अलग रिपोर्ट्स पर आधारित है और इंडिया टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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