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कोचिंग और ट्यूशन में क्या अंतर होता है, कभी सोचा है इसका जवाब; आइए जानते हैं

Interesting Facts | Trending GK Facts : सोशल मीडिया पर आपने कई जगहों और संस्थानों से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में पढ़ा होगा। मगर, क्या आप जानते हैं कि कोचिंग और ट्यूशन में क्या अंतर होता है ?

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Image Source : PEXELS कोचिंग और ट्यूशन में अंतर।

Interesting Facts | Trending GK Facts : आज के भारत में शिक्षा की दौड़ में कोचिंग और ट्यूशन शब्द रोजमर्रा की भाषा बन चुके हैं। माता-पिता अक्सर इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में बुनियादी अंतर है। मगर, क्या आप जानते हैं कि, ये दोनों ही एक दूसरे से काफी अलग हैं। जहां एक ओर, कोचिंग प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यापक तैयारी के लिए संरचित संस्थागत प्रशिक्षण है तो वहीं, ट्यूशन मुख्य रूप से स्कूली पाठ्यक्रम की पूरक मदद है, आइए विस्तार से समझें।

कोचिंग क्या है?

कोचिंग बड़े संस्थानों में चलती है जहां कई टीचर मिलकर काम करते हैं। बैच साइज बड़ा (कई बार सैकड़ों छात्र) होता है। यह मुख्य रूप से IIT-JEE, NEET, UPSC, SSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए होती है। यहां नियमित टेस्ट सीरीज, मॉक इंटरव्यू, स्टडी मटेरियल, डाउट क्लासेस और परफॉर्मेंस ट्रैकिंग का पूरा सिस्टम होता है। कोचिंग कमर्शियल कैम्पस में चलती है और पूरे सिलेबस या कोर्स पैकेज पर फोकस करती है। यह स्किल शार्पनिंग और कॉम्पिटिटिव एज के लिए बेहतर मानी जाती है। 

ट्यूशन क्या है?

ट्यूशन एक व्यक्तिगत या छोटे समूह (1-5-10 छात्र) की अकादमिक सहायता है। इसमें ट्यूटर स्कूल के सिलेबस, होमवर्क, कॉन्सेप्ट क्लियरिंग और बोर्ड परीक्षाओं पर फोकस करता है। यह आमतौर पर घर पर, छोटे सेंटर में या ऑनलाइन होता है। ट्यूशन लचीला होता है और टाइमिंग, सब्जेक्ट और टॉपिक छात्र की जरूरत के अनुसार चुने जा सकते हैं। व्यक्तिगत ध्यान ज्यादा मिलता है, जिससे कमजोर छात्रों की बुनियाद मजबूत होती है। फीस आमतौर पर ज्यादा होती है क्योंकि बैच छोटा होता है। 

कोचिंग और ट्यूशन में मुख्य अंतर 

  • बैच साइज: ट्यूशन का छोटा और कोचिंग का दायरा बड़ा होता है
  • उद्देश्य: ट्यूशन का उद्देश्य स्कूल/बोर्ड सपोर्ट और कॉन्सेप्ट बिल्डिंग व कोचिंग का एंट्रेंस एग्जाम क्रैकिंग और रिजल्ट-ओरिएंटेड होता है
  • लोकेशन और फ्लेक्सिबिलिटी: ट्यूशन घरेलू/लचीला हो सकता है वहीं, कोचिंग फिक्स्ड शेड्यूल वाला संस्थान है
  • फीस: ट्यूशन आमतौर पर महंगी (व्यक्तिगत) लगती है, वहीं, कोचिंग बड़े बैच के कारण सस्ती लगती है। लेकिन कुल खर्च ज्यादा हो सकता है
  • टारगेट: ट्यूशन का टारगेट स्कूली छात्रों पर जबकि कोचिंग का टारगेट स्कूल + कॉम्पिटिटिव दोनों पर रहता है 

दोनों में कौन ज्यादा बेहतर 

यह छात्र की जरूरत पर निर्भर करता है। कमजोर बुनियाद या व्यक्तिगत ध्यान के लिए ट्यूशन, जबकि कॉम्पिटिटिव तैयारी के लिए कोचिंग। कई जगह हाइब्रिड मॉडल (ऑनलाइन + ऑफलाइन) भी चल रहे हैं। गौरतलब है कि, अंत में सच्ची सफलता मेहनत, समझ और मेंटल हेल्थ पर टिकी है, न कि सिर्फ कोचिंग/ट्यूशन पर।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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