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मेट्रो और रैपिड रेल में क्या अंतर है, सफर शुरू करने से पहले जान लें; हर किसी को पता होना चाहिए जवाब

Interesting Facts : सोशल मीडिया पर आपने रेलवे और मेट्रो से जुड़े कई रोचक तथ्यों को तो खूब पढ़ा होगा। मगर, क्या आपको पता है कि मेट्रो और रैपिड रेल में क्या अंतर है ?

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Image Source : REPORTER INPUT नमो रैपिड रेल।

Interesting Facts : भारत में लोग अब 'नमो भारत ट्रेन' और 'मेरठ मेट्रो रेल सेवा' में सफर का लुत्फ भी उठाने वाले हैं। जबकि मेट्रो में सफर दशकों पुरानी बात हो गई है। आधुनिक भारत में जहां एक ओर लोगों को रैपिड रेल की सुविधा मिलने वाली है तो वहीं, दूसरी ओर कई लोग इसकी तस्वीरें देखकर इस सोच में डूबे हैं कि क्या रैपिड रेल और मेट्रो एक ही है ? अगर आपको आपको भी ऐसा ही कन्फ्यूजन है तो आज हम आपकी शंकाओं को दूर कर देंगे। दरअसल, हम आपको बताने वाले हैं कि, मेट्रो और रैपिड रेल में क्या अंतर है ? यदि आप इसके बारे में नहीं जानते हैं तो सफर शुरू करने से पहले अवश्य जान लें। 

मेट्रो ट्रेन क्या है  

मेट्रो ट्रेन एक उच्च गति वाली, बिजली से चलने वाली, तीव्र परिवहन प्रणाली है जो महानगरों के भीतर अलग-अलग ग्रेड-सेपरेटेड पटरियों (भूमिगत, एलिवेटेड या सतही) पर चलती है। शहरी क्षेत्रों में कम दूरी की यात्रा के लिए डिज़ाइन की गई ये ट्रेनें वातानुकूलित, आरामदायक और कुशल परिवहन प्रदान करती हैं, और अक्सर यातायात जाम को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण, पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन विकल्प के रूप में कार्य करती हैं। 

रैपिड रेल क्या है 

रैपिड रेल (नमो भारत ट्रेन) एक सेमी-हाई स्पीड, हाई-फ्रीक्वेंसी वाली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) ट्रेन है, जो 160-180 किमी/घंटा की गति से दौड़ती है। यह 100-250 किमी के इंटरसिटी रूट्स पर मेट्रो से तेज और बुलेट ट्रेन से धीमी, लेकिन अधिक सुलभ परिवहन सेवा प्रदान करती है। इसका मुख्य उद्देश्य शहरों के बीच यात्रा समय को कम करना है। 

Image Source : Reporter Input नमो रैपिड रेल।

मेट्रो और रैपिड रेल में अंतर 

मेट्रो और रैपिड रेल में मुख्य अंतर उनकी गति, स्टॉपेज और यात्रा की दूरी से जुड़ा है। जहां एक ओर मेट्रो 80-100 किमी/घंटा की रफ्तार से शहर के भीतर कम दूरी के लिए चलती है तो वहीं दूसरी ओर रैपिड रेल 160-180 किमी/घंटा की गति से दो शहरों के बीच लंबी दूरी के लिए डिजाइन की गई है, जिसमें कम स्टॉपेज होते हैं। दूसरा अंतर कोच का है। जहां एक ओर मेट्रो में प्राय: 6-8 कोच होते हैं और खड़े होने की जगह ज्यादा होती है तो वहीं, दूसरी ओर रैपिड रेल में शुरू में 3-6 कोच होते हैं और इसमें प्रीमियम कोच का विकल्प भी होता है। मेट्रो शहर के अंदर के स्टॉपेज के लिए है। रैपिड रेल रीजनल है, जो दो शहरों को जोड़ती है (जैसे दिल्ली-मेरठ) और इनके स्टॉपेज दूर-दूर होते हैं। गौरतलब है कि, रैपिड रेल में रिक्लाइनिंग सीटें, वाई-फाई, मोबाइल चार्जिंग, और सामान रखने की जगह जैसे प्रीमियम फीचर्स होते हैं, जो इसे वंदे भारत या शताब्दी जैसी ट्रेनों के समान बनाते हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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