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दुनिया का इकलौता देश, जहां कानून तय करता है पुरुष और महिलाओं की कमर का साइज; नाम सुन चौंक जाएंगे आप

Interesting Facts: सोशल मीडिया पर आपने कई देशों के अनोखे और अजब-गजब कानूनों को पढ़ा होगा। ऐसा ही एक और नियम इन दिनों अचानक चर्चा में आ गया है और इसकी काफी बातें हो रही हैं।

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Image Source : FREEPIK मोटापे को रोकने का अजब कानून।

Interesting Facts: अपने आप फिट रखने के लिए आजकल लोग खूब सेहत का काफी ख्याल रखने लगे हैं। हालांकि, दुनिया भर में अब भी उन लोगों का एक बड़ा वर्ग है जो मोटापे से परेशान हैं। ऐसे लोग अक्सर सोशल मीडिया पर अपने कटु अनुभवों को शेयर करते हैं। इनके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई लोग अपने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन के वीडियो भी शेयर करते हैं। ये बातें हम आपको इसलिए बता रहे हैं क्योंकि सोशल मीडिया पर अचानक एक देश का ऐसा अजब-गजब कानून सामने आया है जो पुरुष और महिलाओं की कमर का साइज फिक्स होने का दावा करता है। 

इंस्टाग्राम पर वायरल पोस्ट में दावा

इंस्टाग्राम पर musclemorph_ नामक हैंडल से एक पोस्ट शेयर की गई है। इसके कैप्शन में लिखा है कि, 'जापान में एक ऐसा कानून है जो सचमुच मोटापे की सीमा तय करता है। इसे मेटाबो कानून कहा जाता है और अगर आपकी कमर सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है, तो हस्तक्षेप शुरू हो जाता है। आलोचक इसे शरीर पर नियंत्रण कहते हैं। जापान इसे निवारक चिकित्सा कहता है। दुनिया की सबसे विवादास्पद स्वास्थ्य नीति के पीछे की सच्चाई यह है यह कानून आंतरिक वसा, यानी आंतों की चर्बी को टारगेट करने के लिए बनाया गया था, जो मेटाबोलिक सिंड्रोम, हृदय रोग और असमय मृत्यु से जुड़ी होती है। इसका उद्देश्य लोगों को शर्मिंदा करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य समस्याओं को प्रकट होने से पहले ही पहचानना है। 40 से 74 वर्ष की आयु के प्रत्येक वयस्क की कमर का माप अनिवार्य है।'

यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया 

इस पोस्ट के कमेंट सेक्शन में अलग-अलग तरह की राय देखने को मिलीं। एक यूजर ने लिखा, 'जापान सचमुच दुनिया के महानतम देशों में से एक है। सम्मान।' दूसरे ने लिखा कि, 'स्वस्थ भोजन करना, स्वस्थ महसूस करना और स्वस्थ दिखना केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है ताकि राष्ट्र भी स्वस्थ रहे।' तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'हम सभी को इस हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इससे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से होने वाली पीड़ा को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। और चिकित्सा प्रणाली पर दबाव भी कम होगा!!' कुछ लोगों ने व्यावहारिक सवाल भी उठाए, जैसे एक व्यक्ति ने पूछा, 'तो... सूमो पहलवानों को किस श्रेणी में रखा जाएगा? हां, वे कुश्ती के कारण फिट तो हो सकते हैं, लेकिन यह एक सांस्कृतिक परंपरा है। इन सभी पहलवानों का क्या होगा??'

Image Source : Freepik मोटापे का कानून।

क्या कहता है जापान का मेटाबो एक्ट

2008 में जापान ने मेटाबोलिक सिंड्रोम निवारण अधिनियम शुरू किया, जिसे अक्सर 'मेटाबो अधिनियम' के रूप में जाना जाता है। इसका उद्देश्य सख्त नियमों के साथ मोटापे से लड़ना नहीं था, बल्कि स्वास्थ्य जोखिमों की जल्द पहचान करना और गंभीर बीमारियों के विकसित होने से पहले लोगों को मार्गदर्शन देना था। इस प्रणाली के तहत 40 से 74 आयु के सभी नागरिकों की वार्षिक स्वास्थ्य जांच की जाती है। इन जांचों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कमर का माप लेना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुरुषों के लिए 85 सेंटीमीटर (33.46 इंच) से अधिक कमर का आकार जोखिम का संकेत माना जाता है। महिलाओं के लिए यह सीमा 90 सेंटीमीटर (35.43 इंच) है। इन सीमाओं को पार करने पर कोई दंड या जुर्माना नहीं होता है। इसके बजाय, व्यक्तियों को निःशुल्क पोषण परामर्श, व्यायाम संबंधी मार्गदर्शन और अनुवर्ती कार्यक्रम प्रदान किए जाते हैं। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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