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शादी की किस दावत को 'वलीमा' कहते हैं, नाम सुनकर सबको होता है कन्फ्यूजन; नहीं जानते हैं तो जान लें

Interesting Facts : सोशल मीडिया पर आपने कई परंपराओं में होने वाली शादियों से जुड़े अनोखे फैक्ट्स के बारे में पढ़ा होगा। मगर, आज हम आपको बताएंगे कि, शादी की किस दावत को वलीमा कहते हैं ?

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Image Source : FREEPIK वलीमा की प्रतीकात्मक फोटो।

Interesting Facts : शादियों में जाना और वहां दावत उड़ाना हर किसी को बेहद पसंद ​होता है। बात जब भारतीय शादियों की हो तो उस आमंत्रण को भला कोई कैसे ठुकरा सकता है। रंग-बिरंगे कपड़े, 56 भोग/व्यंजन, तेज डीजे और तरह-तरह की रस्म-परंपराएं ऐसी तमाम वजहें हैं जो किसी को भी शादी में जाने के लिए आकर्षित कर सकती हैं। हालांकि, परंपराओं की बात करें तो इस मामले में भारत काफी ज्यादा समृद्ध है। भारत में जिस तरह कोस-कोस पर बोली बदल जाती है ठीक उसी प्रकार परंपराओं में भी विविधता देखने को मिलती है। शादी का आयोजन इसी बात का जीवंत उदाहरण है। वेडिंग सेरेमनी से जुड़ी दावतों को भारत में रीति-रिवाजों के आधार पर अलग-अलग नामों से जानते हैं। मांगलिक कार्यक्रम, प्रीतिभोज, सम्यक भोज, निकाह, वलीमा ऐसे कई नाम हैं जो खूब प्रचलित हैं। इनमें से एक नाम वलीमा का आता है जिसे लेकर लोगों में काफी कन्फ्यूजन देखने को मिलता है। कई बार लोग समझ नहीं पाते हैं कि वलीमा शादी से पहले होता है या बाद में ? यदि आपको भी नहीं पता है तो आज हम आपको बताएंगे कि वलीमा क्या होता है और शादी की किस दावत को वलीमा कहा जाता है ? 

वलीमा किस भाषा का शब्द है 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'वलीमा' अरबी भाषा का एक शब्द है। यह इस्लाम में निकाह (विवाह) की परंपरा से जुड़ा एक आयोजन है। वलीमा शब्द अरबी के 'अवलाम' से उद्धृत है जिसका अर्थ है - एकत्रित या इकट्ठा होना। 

वलीमा क्या होता है 

मुस्लिम समाज में निकाह के बाद दी जाने वाली सामूहिक दावत को 'वलीमा' कहा जाता है। वलीमा को रिसेप्शन भी कहा जा सकता है जिसे हिन्दी में प्रीतिभोज कहा जाता है। मुस्लिम समाल में वलीमा करने को सुन्नत माना जाता है। आमतौर पर वलीमा को निकाह पढ़ने के तीन दिन बाद दूल्हा पक्ष की ओर से आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य निकाह की सार्वजनिक घोषणा और दोस्त-परिवार समेत स्वजन के साथ खुशी मनाना है। ये भी कहा जाता है कि वलीमा अगर अपनी क्षमता यानी हैसियत के मुताबिक भी किया जाए तो भी यह सुन्नत अदा करता है। 

सामाजिक और धार्मिक परंपरा 

रिसेप्शन/प्रीतिभोज/वलीमा ये परंपरा पूरी तरह सामाजिक और धार्मिक आयोजन कहा जाता है। लोग मानते हैं कि, ये सामाजिक और धार्मिक परंपरा है इसलिए इसमें न तो दिखावा होना चाहिए और न ही फूहड़ता। बेहद सादगी से किए जाने वाले इस इवेंट में परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, सहकर्मी और स्वजन समेत हर उस शख्स को बुलाया जाता है जो वास्तव में शुभचिंतक होता है। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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