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शहरों के नाम में पुर, बाद और गढ़ क्यों लिखा जाता है, क्या आपको पता है; जान लें जवाब

Fascinating Facts | Hindi GK : सोशल मीडिया पर आपने कई शहरों से जुड़े अनसुने फैक्ट पढ़े होंगे। मगर, आज हम आपको बताएंगे कि, शहरों के नाम में पुर, बाद और गढ़ क्यों लिखते हैं ?

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Image Source : INDIAN RAIL INFO Trending GK Quiz : शहरों के नाम में पुर, बाद और गढ़ क्यों लिखते हैं

Fascinating Facts | Hindi GK : भारत विविधता का देश है, जहां हर शहर का नाम अपनी कहानी कहता है। आपने देखा होगा कि कानपुर, जयपुर, हैदराबाद, अहमदाबाद, रायगढ़ या चित्तौड़गढ़...इन नामों के अंत में आने वाले 'पुर', 'बाद' (आबाद) और 'गढ़' जैसे प्रत्यय इस्तेमाल होते हैं। क्या आपको पता है कि, इन प्रत्ययों का क्या मतलब है और इन्हें लिखने की आवश्यकता क्यों पड़ी ? दरअसल, ये ​प्रत्यय सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, भाषा और शासन व्यवस्था के प्रमाण हैं। ये प्रत्यय प्राचीन काल से मध्यकाल तक के साम्राज्यों, राजाओं और बसावटों की गवाही देते हैं। आज हम आपको इनके बारे में विस्तार से बताएंगे: 

प्रत्यय का महत्व 

शहरों के नाम के आगे लगे प्रत्यय भारत की भाषाई मिश्रण को दिखाते हैं। मसलन, संस्कृत (आर्य प्रभाव), फारसी (मुगल/इस्लामिक), और स्थानीय भाषाएं। प्राचीन काल में 'पुर' प्रबल था, मध्यकाल में 'आबाद' बढ़ा। ये प्रत्यय सिर्फ नाम नहीं, बल्कि सभ्यता के विकास को बताते हैं। आज भी नए शहरों में कभी-कभी ये इस्तेमाल होते हैं, लेकिन ज्यादातर पुराने नाम इतिहास संजोए रखते हैं। भारत जैसे विविध देश में नाम भाषा, धर्म, राजवंश और भूगोल की कहानी सुनाते हैं। 

'पुर' का मतलब और लिखने की वजह 

'पुर' संस्कृत का शब्द है। इसका अर्थ है नगर, शहर, बस्ती या किला। इसका संबंध 'मजबूत स्थान' या 'किला' से है। ऋग्वेद जैसे प्राचीन ग्रंथों में 'पुर' का उल्लेख मिलता है, जहां यह दीवारों से घिरे शहर या किले को दर्शाता है। प्राचीन भारत में राजा जब नई राजधानी या बस्ती बसाते थे, तो अक्सर अपने नाम के साथ 'पुर' जोड़ देते थे। उदाहरण: जयपुर (महाराजा जय सिंह), उदयपुर (उदय सिंह), कानपुर (कान्हा या कर्ण), नागपुर आदि। हस्तिनापुर (महाभारत काल) इसका क्लासिक उदाहरण है। 'पुर' मुख्य रूप से हिंदू राजवंशों और प्राचीन बसावटों से जुड़ा है। दक्षिण भारत में यह 'पुरम' या 'पुरी' के रूप में मिलता है, जैसे तिरुपति या कांचीपुरम। यह दर्शाता है कि जगह पहले से ही महत्वपूर्ण बस्ती या किला थी।

'बाद (आबाद)' का मतलब और लिखने की वजह 

'बाद' या 'आबाद' फारसी (Persian) भाषा से उद्धृत है। 'आब' का अर्थ पानी और 'आबाद' का अर्थ 'बसा हुआ।' 'बाद' प्रत्यय मुगल काल और मध्यकालीन इस्लामिक शासकों के समय यह लोकप्रिय हुआ। राजा या सूबेदार नई बस्ती बसाकर इसे अपने नाम से जोड़ते थे, ताकि समृद्धि और बसावट का संदेश जाए। उदाहरण: हैदराबाद (हैदर + आबाद), अहमदाबाद (अहमद शाह), इलाहाबाद (अब प्रयागराज, लेकिन पुराना नाम), मुर्शिदाबाद आदि। पानी की उपलब्धता (आब) इन बस्तियों के लिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि सूखे क्षेत्रों में सिंचाई और बसावट पानी पर निर्भर थी। 'आबाद' नाम अक्सर मध्यकालीन समृद्ध व्यापारिक या प्रशासनिक केंद्रों से जुड़े हैं।

'गढ़' का मतलब और लिखने की वजह 

'गढ़' हिंदी/संस्कृत से आया, जिसका अर्थ किला (Fort) या मजबूत स्थान है। यह उन जगहों के लिए इस्तेमाल होता था जहां सुरक्षा की दृष्टि से किले बनाए गए थे। राजपूताना, हिमालयी क्षेत्र और पूर्वी भारत में यह आम है। उदाहरण: चित्तौड़गढ़, रायगढ़, कोटागढ़, लखनऊ के पास काकोरीगढ़ आदि। 'गढ़' नाम वाले स्थान अक्सर पहाड़ी या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण थे, जहां युद्ध या सुरक्षा की जरूरत पड़ती थी। चंडीगढ़ (चंडी + गढ़) आधुनिक उदाहरण है, हालांकि मूल अर्थ किले वाला ही है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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