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रेलवे ट्रैक पर सिल्वर बॉक्स क्यों लगाए जाते हैं, इसके पीछे छिपी है बेहद अहम वजह; हर किसी को जानना जरूरी

Railway Interesting Facts: सोशल मीडिया पर आपने रेलवे से जुड़े अनोखे और जानकारीपरक कई तथ्य पढ़े होंगे। आज हम आपको ऐसे ही एक और फैक्ट से रूबरू कराने जा रहे हैं जिसके बारे में शायद आपने न सुना हो।

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Image Source : NETWORKRAIL.CO.UK रेलवे ट्रैक पर लगे बॉक्स।

Railway Interesting Facts: भारतीय रेलवे अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पुरानी व्यवस्थाओं में कई तरह​ के बदलाव कर रहा है। इन बदलावों में स्वच्छता, आधुनि​कीकरण और रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण भी शामिल है। अपनी दूर​दर्शिता और विस्तृत नियोजन की मदद से रेलवे कई उपलब्धियों को भी प्राप्त कर रहा है। यदि आपको नहीं पता है तो बता दें कि, अपनी इन्हीं विशेषताओं के चलते भारतीय रेलवे को दुनिया के सबसे बड़े रेलवे स्टेशनों की गिनती में गिना जाता है। हालांकि, भारत के रेल नेटवर्क में कितना बदलावा आया है ​ये तो सफर करने वाले यात्री महसूस करते ही होंगे। मगर क्या आपने कभी गौर किया है जिस रेलवे ट्रैक से हमारी ट्रेन गुजरती है उसी रेलवे ट्रैक पर सिल्वर कलर के कुछ बॉक्स लगे होते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि, आखिर रेलवे ट्रैक पर ये बॉक्स क्यों लगाए जाते हैं और इनको लगाने का क्या उद्देश्य है ? 

रेलवे ट्रैक पर लगे बॉक्स क्या कहलाते हैं

सबसे पहले आपको बता दें कि, रेलवे ट्रैक पर जो सिल्वर बॉक्स आप देखते हैं वे बॉक्स एल्युमीनियम के बने होते हैं, इन्हें 'एक्सल काउंटर बॉक्स' कहा जाता है। भारतीय रेलवे के द्वारा रेलवे ट्रैक पर एक्सल काउंटर बॉक्स को बेहद खास वजह और उद्देश्य से लगाया जाता है।  

एक्सल काउंटर बॉक्स क्या करते हैं 

रेलवे ट्रैक पर लगाए जाने वाले एक्सल काउंटर बॉक्स उन ट्रेनों के पहियों यानी एक्सल की गिनती करते हैं जो उसके सामने बिछी पटरियों से गुजरती है। इन बक्सों को लगाने का उद्देश्य ये पता करना है कि कोई कोच ट्रेन से अलग न हुआ हो। ऐसे में दुघर्टना की स्थिति को देखते हुए सिग्नल लाल करके ट्रेन रोक जा सकती है ताकि कोई बड़ा हादसा न हो। 

कैसे काम करते हैं एक्सल काउंटर बॉक्स

गौरतलब है कि, एक्सल काउंटर बॉक्स के अंदर एक डिवाइस लगी होती है जो ट्रेन की पटरियों से कनेक्ट होती है। ये बक्सा ट्रेन की बोगी के पहियों को जोड़कर रखता है।

Image Source : indianrailinfoपटरियों पर लगी डिवाइस।

जब ट्रेन गुजरती है तो डिवाइस की मदद से एक्सल काउंटर बॉक्स में पहियों की संख्या दर्ज हो जाती है। ये सिल्वर बॉक्स ट्रैक पर हर 3 से 5 किमी पर लगे होते हैं। ट्रेन के पहिये गिनते ही उसका डाटा ये बॉक्स अगले बॉक्स को भेज देता है। यदि आगे वाले बॉक्स को पिछले बॉक्स की तुलना में पहियों की संख्या कम मिलती है तो ये माना जाता है कि, ट्रेन का कोई डिब्बा या तो अलग हुआ है या डिरेल हो गया है। ऐसे में अगला बॉक्स तत्काल प्रभाव से सिग्नल को रेड कर देता है, इससे ट्रेन रुकती है और हादसे का जानकारी मिल जाती है। इसके बाद रेलवे विभाग द्वारा आगे की जांच और कार्रवाई की जाती है। 
 

रेलवे ट्रैक की रोचक बातें

रेलवे ट्रैक की और कई रोचक बातें हैं जिनके बारे में काफी कम लोग जानते हैं। आपको बता दें कि, रेलवे ट्रैक पर बिछी नुकीली गिट्टी ट्रेन के भारी वजन को संभालने, पानी निकालने और घास-फूस रोकने में मदद करती है। ट्रैक पर बिछीं पटरियां खास स्टील से बनती हैं जो जंग प्रतिरोधी होती हैं। गोल पत्थरों की जगह नुकीले पत्थर इस्तेमाल होते हैं क्योंकि वे एक-दूसरे में फंसकर मजबूत पकड़ बनाते हैं और ट्रेन के लाखों किलोग्राम वजन को संभालते हैं।

Image Source : Freepik रेलवे ट्रैक।

दूसरी रोचक बात है कि, पटरियां खास स्टील से बनती हैं, इन पर विशेष कोटिंग होती है और लगातार चलने वाली ट्रेनें अपनी पहियों से हल्की जंग को हटा देती हैं, जिससे ये चमकदार और टिकाऊ रहती हैं। बता दें कि, रेलवे ट्रैक पर बिछी पटरियां काफी मोटी और एक जैसी धातु की होती हैं कि जंग जल्दी अंदर तक नहीं फैल पातीं। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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