उम्र सिर्फ एक संख्या है...इस बात को ब्रिटेन की 99 वर्षीय हेल्गा डफी ने साबित कर दिया है। उन्होंने विमान के पंख पर खुद को बांधकर उड़ान भरी और दुनिया की सबसे उम्रदराज विंग वॉकर बनकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यह उपलब्धि सिर्फ साहस की मिसाल नहीं, बल्कि चैरिटी के लिए भी प्रेरणादायक है।
एयरफील्ड पर जाकर दिखाया करतब
हेल्गा डफी, जो जर्मनी मूल की हैं और अब विल्टशायर के डेविजेस स्थित केयर होम में रहती हैं, ने ग्लॉस्टरशायर के सिरेनसेस्टर स्थित आरएफसी रेंडकॉम्ब एयरफील्ड पर यह कारनामा अंजाम दिया। उन्हें छोटे विमान (बायप्लेन) के ऊपरी पंख पर मजबूती से बांधा गया और वे करीब आठ मिनट तक हवा में रहीं। रिकॉर्ड के लिए कम से कम पांच मिनट हवा में रहना जरूरी था, जिसे उन्होंने आसानी से पूरा किया।
गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम
हेल्गा की प्रेरणा बेट्टी ब्रोमेज बनीं, जिन्होंने 97 साल की उम्र में विंग वॉक कर महिला श्रेणी का रिकॉर्ड बनाया था। समाचारों में बेट्टी का कारनामा देखकर हेल्गा ने ठान लिया कि वे भी यह कर सकती हैं। मूल रूप से यह उड़ान उनके 99वें जन्मदिन (23 सितंबर) पर होनी थी, लेकिन स्थगित होकर अक्टूबर में संपन्न हुई। उस समय उनकी उम्र 99 वर्ष और 21 दिन थी। इस चुनौती से उन्होंने विल्टशायर एंड बाथ एयर एम्बुलेंस के लिए 1,300 पाउंड से अधिक की राशि जुटाई। चैरिटी से जुड़े लोगों ने उन्हें “लीजेंड” बताया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिकारी विल मनफोर्ड ने लैंडिंग के बाद उन्हें सर्टिफिकेट सौंपा, जो अब उनके केयर होम में प्रदर्शित है। उनकी भतीजियां जैकी रोज और जूली प्रीस भी वहां मौजूद रहीं और उन्हें स्वतंत्र व साहसी महिला बताया।
घुटनों की समस्याएं भी नहीं बनीं बाधा
पूर्व नर्स रहीं हेल्गा ऑस्टियोआर्थराइटिस और घुटने की समस्या से जूझती हैं, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उड़ान के बारे में उन्होंने कहा, “मैं डरी नहीं क्योंकि मैं बहुत उत्साहित थी। यह एहसास अजीब (peculiar) था।” उनका मोटो है- “कुछ भी आजमाओ। कभी मत कहो कि मैं कुछ नहीं कर सकती। जब तक कोशिश न करो, पता नहीं चलता।” इनके वीडियो को इंस्टाग्राम पर @guinnessworldrecords नामक हैंडल से शेयर किया गया है।
रिकॉर्ड बनाने वाले पिछले शख्स ने दी बधाई
पहले के रिकॉर्ड होल्डर बेट्टी ब्रोमेज ने हेल्गा को बधाई दी, लेकिन मजाक में कहा कि 100 साल की उम्र में वे फिर कोशिश करेंगी और रिकॉर्ड वापस लेंगी। हेल्गा सात भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। उन्होंने कहा कि उनके पिता उन पर गर्व करते। यह घटना उम्र की सीमाओं को चुनौती देती है। केयर होम में रहने के बावजूद हेल्गा ने साबित किया कि सपने और साहस कभी बुढ़ापे का इंतजार नहीं करते। उनकी उड़ान ने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाया, बल्कि कई लोगों को प्रेरित भी किया कि जीवन में हमेशा कुछ नया आजमाने की हिम्मत रखनी चाहिए।
गौरतलब है कि, इससे पहले एक बच्चे ने शीर्षासन करते हुए 3 मिनट तक शिव तांडव स्तोत्रम पढ़ने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
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