Viral Video : शहरों में हाईराइज अपार्टमेंट्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लोग इन्हें बेहतर सुरक्षा, आधुनिक सुविधाओं, स्विमिंग पूल, जिम और क्लब हाउस के कारण पसंद करते हैं। शानदार व्यू, कनेक्टिविटी और स्टेटस सिंबल भी आकर्षण हैं। व्यस्त जीवनशैली में सुविधाजनक और लग्जरी लिविंग का विकल्प बन गए हैं हाईराइज। मगर, एक महिला ने ऊंची इमारत में रहने के अपने अनुभव को साझा करने और यह समझाने के बाद सोशल मीडिया पर एक बहस छेड़ दी है कि बाहर से आकर्षक दिखने के बावजूद, यह जीवनशैली अंदर से अक्सर अकेलापन महसूस करा सकती है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया अनुभव
इंस्टाग्राम पर @anjalichaudhary713 नामक हैंडल से महिला ने पोस्ट किया। इसमें बताया कि एक ऊंची इमारत में रहने के बाद ऊंची इमारतों में रहने के बारे में उनकी सोच कैसे बदल गई। उन्होंने कहा कि रोशनी, बनावट और आधुनिक सुविधाओं के कारण ऐसी इमारतें आकर्षक लग सकती हैं, लेकिन सामाजिक संबंधों की कमी महसूस करने वालों के लिए वास्तविकता बहुत अलग हो सकती है। वीडियो में अंजली ने कहा, 'कसम से, ये ऊंची इमारतें, इस तरह की इमारतें, सच कहूं तो, दूर से ही अच्छी लगती हैं। यहां रहने से पहले, मैं सोचती थी कि किसी इमारत में रहना कितना आरामदायक होगा। आप जानते हैं, वो सारी चकाचौंध, वो रोशनी... वहां रहने का एक अलग ही आकर्षण होता है। लेकिन जब से मैं यहां आई हूं, वो सारा मजा गायब हो गया है। अब ये इमारत मुझे जेल जैसी लगती है।'
'यहां कोई किसी से बात नहीं करता'
अंजली ने कहा, 'यहां कोई किसी से बात नहीं करता। हम चार साल पहले यहां आए थे, लेकिन हमें यह नहीं पता कि बगल वाले घर में कौन रहता है, वे कब घर से निकलते हैं या कब लौटते हैं। अब उन्हें पड़ोसियों के साथ बिताए उन पलों की याद आती है, जब वे मिलने आते, बातें करते और चाय पर बैठकर सुकून भरे पल साझा करते थे। अब मुझे लगता है कि काश हमारे एक-दो पड़ोसी होते जो आते, बैठते, बातें करते और चाय पीते। लेकिन ऐसा कभी होता ही नहीं। कभी-कभी जब बारिश होती है, तो मुझे लगता है कि काश हमारे पास एक छत होती ताकि हम बाहर जाकर बारिश का आनंद ले सकें।'
यूजर्स ने किया रिएक्ट
इस वीडियो को अब तक 11 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है और यूजर्स से कई प्रतिक्रियाएं मिली हैं, जिनमें से कई ने उनके अनुभव से खुद को जुड़ा हुआ महसूस किया है। एक यूजर ने लिखा, 'यह बिल्कुल सच है, ऊंची इमारतों में रहना आलीशान लगता है लेकिन बहुत अकेलापन महसूस होता है।' दूसरे ने लिखा कि, 'पुराने मोहल्लों में एक अलग ही अपनापन होता था, लोग सचमुच एक-दूसरे की परवाह करते थे।' तीसरे ने कहा कि, 'मैंं भी ऐसी ही एक इमारत में रहता हूं और मुझे तो यह भी नहीं पता कि मेरे फ्लोर पर कौन रहता है।' एक और यूजर ने कहा, 'छत वाली बात तो बिल्कुल सच है, खासकर बारिश के मौसम में।' किसी और ने लिखा, 'आधुनिक घरों में आराम तो होता है, लेकिन पुराने घरों में अपनापन होता था।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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