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'जो CAA के दायरे में नहीं, उसे BSF के हाथों किया जाएगा हैंडओवर, 27 KM जमीन पर हो रही घेराबंदी', CM शुभेंदु का ऐलान

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में सुरक्षा और घुसपैठिए के मुद्दे पर बड़ी कार्रवाई की है। सीएम ने साफ कहा कि जो सीएए के दायरे में नहीं हैं, उन्हें बीएसएफ के हांथों कर दिया जाएगा।

सीएम शुभेंदु अधिकारी- India TV Hindi
Image Source : PTI सीएम शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से शुभेंदु अधिकारी एक्शन में हैं। सीएम ने घुसपैठिए के मुद्दे पर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में जो लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में नहीं हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब बदल गया समय- शुभेंदु अधिकारी

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकार सुरक्षा के लिए भारत बांग्लादेश सीमा पर जमीन देने की परमिशन नहीं दे रही थी। लेकिन अब समय बदल गया है। राष्ट्रभक्त सरकार की तरफ से जमीन दी जा रही है। घेराबंदी के लिए 27 किलो मीटर जमीन दी जा रही है। 

आज से लागू किया गया कानून

साथ ही उन्होंने कहा कि वोट बैंक, तुष्टिकरण के लिए पूर्व की राज्य सरकार ने जमीन नहीं दी थी। आज (18KM+9KM) 27 किलोमीटर जमीन दी जा रही है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत 7 कम्युनिटी के लोग जो हैं, जिन्होंने अपील की है, उन्हें छोड़कर जो कोई भी है। उन्हें बीएसएफ के हाथों हैंडओवर किया जाएगा। ये कानून आज से लागू किया गया है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने सत्ता में आने के 11 दिन में फेंसिंग और आउटपोस्ट के लिए जमीन हैंडओवर की है।

जानिए क्या है CAA

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का दायरा मुख्य रूप से भारत के पड़ोसी तीन देशों, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए कुछ धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने से जुड़ा है।
इस कानून के तहत हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के उन लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है, जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ चुके थे।

मुस्लिम समुदाय को CAA में नहीं किया गया शामिल

इस कानून की सबसे खास बात ये है कि यह केवल 3 देशों से आए लोगों पर लागू होता है। मुस्लिम समुदाय को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इस कारण इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। यह कानून भारतीय नागरिकों की नागरिकता छीनने का नहीं, बल्कि कुछ शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है। यह कानून 2019 में संसद से पारित हुआ था। 

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