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"गद्दारों को जाना है तो जाएं, इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें", TMC बागियों पर कीर्ति आजाद और कल्याण बनर्जी का बड़ा हमला

कल्याण बनर्जी ने कहा कि चुनाव के दौरान वही काकोली दस्तीदार ममता बनर्जी की प्रशंसा करते नहीं थकती थी। ऐसे नेता अब बहाना दे रहे हैं कि वो टीएमसी में रहकर विकास का काम नहीं कर पा रहे थे।

Kalyan Banerjee and Kirti Azad- India TV Hindi
Image Source : PTI टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी (बाएं) और कीर्ति आजाद

तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के भीतर सियासी भूचाल की आहट और तेज हो गई है। पार्टी के बागी सांसदों के बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पहुंचने और पाला बदलने की अटकलों के बीच, टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा खोल दिया। लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों, खासकर काकोली घोष दस्तीदार और शर्मिला सरकार पर तीखा हमला बोला है। नेताओं ने उन्हें गद्दार बताते हुए चुनौती दी है कि अगर उनमें जरा भी गैरत है, तो वे सांसद पद से इस्तीफा दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें।

काकोली का फोन सुबह से बंद

इस बीच, काकोली घोष दस्तीदार का फोन आज सुबह से बंद आ रहा है और उनके करीबी लोगों के पास भी स्पीकर से मुलाकात को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।

"स्पीकर को नहीं मिली कोई चिट्ठी"

कल्याण बनर्जी ने कहा, काकोली घोष दस्तीदार की वो चिट्ठी जो स्पीकर को लिखी गई, वो 24 घंटे बाद भी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। लोकसभा स्पीकर के ऑफिस का भी कहना है कि अभी तक कोई चिट्ठी नहीं आई। जिस तरह से वो लोग भूपेंद्र यादव के घर गए..किसने मिलाया, कैसे मिलाया ये सब पता नहीं, लेकिन अब उनके नेता पीएम नरेंद्र मोदी हो गए, ममता बनर्जी नहीं रहीं। उनके पास 20-21 या जितने भी सांसद हो, उन्हें अगर 10th शेड्यूल (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य होने से बचना होग, तो उन्हें बीजेपी में शामिल होना ही होगा। चुनाव के दौरान वही काकोली दस्तीदार ममता बनर्जी की प्रशंसा करते नहीं थकती थी। जो नेता प्रशंसा करते नहीं थकते थे, वो अब बहाना दे रहे हैं कि वो टीएमसी में रहकर विकास का काम नहीं कर पा रहे थे। अगर बीजेपी में जाना है, तो जाएं, टिकट लें और चुनाव लड़ें। इन सभी लोगों ने गद्दार की है..ये सभी गद्दार हैं।"

उन्होंने कहा, "जैसे ही ये सभी सांसद (टीएमसी के बागी) भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे, ये सब बेनकाब हो गए। जब आरजी कर की घटना हुई तब शर्मिला सरकार और  काकोली दस्तीदार कहां थे? उस वक्त वो नहीं बोले लेकिन मैं बोला। अगर काकोली दस्तीदार कह रही हैं कि कि उन्हें सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, तो वो ये कैसे कह रही हैं, चीफ व्हिप का पद कैसे मांग सकती हैं? वो पार्टी के सांसदों को सदन में संभालने के लिए है। NDA एक गठजोड़ है, कोई पार्टी नहीं। आपके पास दो तिहाई बहुमत नहीं है..आपको डर है कि पार्टी से आपको निकाल दिए जाएगा। अब जब बीजेपी के गुंडे तुम्हारे कार्यकर्ता मारेंगे तो क्या करोगे।"

"सिर्फ 32 लाख वोट से हमें हराया गया, हम हारे नहीं"

कल्याण बनर्जी ने कहा, "तुममें जरा भी गैरत है तो बोलो। जब तुम्हारे कार्यकर्ता मार खाएंगे, तो हम जाएंगे लड़ने। 32 लाख वोट से सिर्फ हमें हराया गया..हम हारे नहीं। 29 के अंदर बीजेपी साफ हो जाएगी..केंद्र और राज्य दोनों में। काकोली और शर्मिला बताएं कि तुम्हारे साथ क्या गलत हुआ? तुम मूंग और मसूर की दाल। 5 बार चुनाव हारी, दीदी ने तुम्हें जिताया। तुम संसद नहीं आती..तो तुम्हे चीफ व्हिप से हटाया गया। बताओ तुम्हारी पार्टी क्या है? कभी तृणमूल का नाम नहीं लेना। जब शेरनी घायल होती है, तो ज्यादा खतरनाक होती है। ये पार्टी विरासत में नहीं मिली है।"

"गद्दारों को जाना है जाए, कभी तृणमूल का नाम नहीं लें"

पार्टी के वरिष्ठ नेता कीर्ति आजाद ने भी बागी गुट को आड़ों हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ये सब बीजेपी के इशारे पर हो रहा है। बागी सांसदों को शर्म आनी चाहिए। काकोली घोष 3 चुनाव हारी, फिर भी ममता जी ने सांसद बनवाया। व्हिप से हटाया, संसद में नहीं आती थी। तकलीफ थी, तो पहले बताती। भूपेंद्र यादव के यहां चाय पी रहे हो। गद्दारों को जाना है जाए, कभी तृणमूल का नाम नहीं लें। मां-माटी-मानुष की बात करते हैं, ये पार्टी विरासत में नहीं मिली है।

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