पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को ऐलान किया कि राज्य मंत्रिमंडल ने आवास योजना 'बांग्लार बाड़ी' का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग आवास' कर दिया है और 10 लाख से अधिक लाभार्थियों को वित्तीय सहायता की अंतिम किस्त जारी कर दी गई है।
राज्य सचिवालय नबान्न में योजना के तहत राशि की दूसरी और अंतिम किस्त जारी करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 10,20,379 लाभार्थियों को 60-60 हजार रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत कुल 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने मंत्रिमंडल में फैसला किया है कि 'बांग्लार बाड़ी' को अब 'पश्चिम बंग आवास' के नाम से जाना जाएगा।"
दुर्गा पूजा के बाद नए लाभार्थियों को पहली किस्त
उन्होंने कहा कि अक्टूबर में दुर्गा पूजा उत्सव के बाद कई लाख नए लाभार्थियों को योजना की पहली किस्त जारी की जाएगी। योजना के तहत लाभार्थियों को घर बनाने के लिए दो किस्तों में कुल 1.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि योजना के तहत करीब 20 लाख नए आवेदकों को पहले ही शामिल किया जा चुका है और आगे भी और नाम जोड़े जाएंगे।
उन्होंने कहा, "पश्चिम बंग नाम के साथ एक बड़ा ऐतिहासिक महत्व जुड़ा है। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय इसे पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की साजिश रची गई थी, जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में विफल कर दिया गया।" मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने यह भी फैसला किया है कि राज्य के नाम से "पश्चिम" शब्द नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को इसके पीछे के ऐतिहासिक कारणों की जानकारी होनी चाहिए।
कार्यालयों में बांग्ला को प्राथमिकता
हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में प्रशासनिक कामकाज और आधिकारिक पत्राचार को लेकर भी एक बड़ा कदम उठाया। राज्य सरकार 1 सितंबर से सभी आधिकारिक पत्राचारों में बांग्ला भाषा का अनिवार्य रूप से उपयोग करेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 20 जुलाई को राज्य विधानसभा में इसकी औपचारिक घोषणा की। विधानसभा में घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उन्हें लिखा गया एक पत्र पढ़कर सुनाया। उस पत्र में केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य प्रशासन के हर स्तर पर भारतीय भाषाओं, विशेषकर बांग्ला भाषा के व्यापक उपयोग और विकास के लिए कदम उठाने का आग्रह किया था।
गृह मंत्री ने सुझाव दिया था कि भूमि और भू-राजस्व विभाग से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक, फाइल प्रबंधन, टिप्पणियां, विभागीय बातचीत, आदेश, सार्वजनिक सेवाएं, डिजिटल प्रशासन, वेबसाइट, मोबाइल ऐप और मीडिया विज्ञापनों में बांग्ला भाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और अन्य राज्यों के साथ होने वाले सभी आधिकारिक पत्राचार में बांग्ला भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि केंद्र सरकार के साथ पत्राचार बांग्ला के साथ-साथ राजभाषा हिंदी में भी किया जाएगा।
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