कौशिकी अमावस्या के अवसर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कालीघाट मंदिर पहुंचे और मां काली की पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान के साथ देवी काली की पूजा की और उन्हें बनारसी साड़ी तथा फूलों की माला अर्पित की।
जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण किया
पूजा के दौरान मुख्यमंत्री ने देवी काली को मछली का भोग लगाया। पूजा संपन्न होने के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर मछली का प्रसाद ग्रहण किया। मुख्यमंत्री के इस अंदाज की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
नॉन-वेज को लेकर बंगाल में सियासी गर्मी तेज
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब दुर्गा पूजा के दौरान नॉन-वेज खाने को लेकर पश्चिम बंगाल में सियासी बहस तेज है। बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री की ओर से दुर्गा पूजा के दौरान नॉन-वेज खाने को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विवाद खड़ा हो गया था। उनके बयान पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
बीजेपी ने कहा- नॉन-वेज खाने से कोई आपत्ति नहीं
हालांकि, बीजेपी नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्हें दुर्गा पूजा के दौरान नॉन-वेज खाने से कोई आपत्ति नहीं है। इसी पृष्ठभूमि में कौशिकी अमावस्या के मौके पर कालीघाट मंदिर में मुख्यमंत्री द्वारा देवी को मछली का भोग लगाने और बाद में प्रसाद के रूप में मछली ग्रहण करने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
काली मंदिरों में चढ़ाया जाता है मछली का भोज
बंगाल में मां काली की पूजा की अपनी विशिष्ट परंपराएं हैं और कई काली मंदिरों में मछली समेत विभिन्न प्रकार के भोग चढ़ाए जाते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह धार्मिक अनुष्ठान बंगाल की स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर दी सफाई
वहीं, धीरेंद्र शास्त्री ने अपने मछली-मांस वाले बयान पर गुरुवार को सफाई भी दी है। उन्होंने कहा कि उनके बयान का मकसद किसी की खान-पान की स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं, बल्कि अहिंसा का संदेश देना था। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बात को गलत संदर्भ में समझा और पेश किया गया।
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