पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने पार्षदों को सख्त संदेश दिया है। टीएमसी ने जमीनी स्तर पर काम तेज करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी कि वार्डों में उनके प्रदर्शन से ही उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला होगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की औपचारिक शुरुआत राजपत्र अधिसूचना जारी होने और नामांकन शुरू होने के साथ हो गई है।
सड़क पर उतरें टीएमसी पार्षद और महापौर
टीएमसी नेतृत्व ने पार्षदों, महापौरों और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से अपने कार्यालयों से बाहर निकलकर सड़कों पर जाने को कहा है। साथ ही उन्हें चेतावनी दी गई है कि उनका राजनीतिक भविष्य विधानसभा चुनाव में उनके वार्डों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि यह निर्देश शीर्ष नेतृत्व से आया है।
घर-घर जाकर करें प्रचार
सीनियर नेताओं के अनुसार, राज्य भर में स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को प्रतिदिन घर-घर जाकर प्रचार करने, बूथ स्तरीय बैठकों में भाग लेने और मतदाताओं से सीधा संपर्क बनाए रखने के लिए कहा गया है। हालांकि, केवल उनकी उपस्थिति के आधार पर उनके प्रदर्शन का आकलन नहीं किया जाएगा।
पार्षदों पर निगरानी रख रही पार्टी
पार्टी वार्ड वार आकलन तैयार कर रही है कि प्रत्येक पार्षद चुनाव प्रचार में कितना समय व्यतीत करता है, कितने घरों का दौरा करता है, उस पार्षद की देखरेख में स्थानीय कार्यकर्ता कितने सक्रिय हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या पार्टी उस वार्ड में बढ़त हासिल कर सकती है।
शहरी वोटर्स को लेकर टीएमसी है चिंतित
यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब तृणमूल अपने शहरी आधार में आ रही कमी को लेकर चिंतित है। हालांकि, पार्टी ग्रामीण बंगाल के बड़े हिस्से में चुनावी रूप से मजबूत बनी हुई है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों ने कोलकाता और आसपास के कई शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में इसकी कमजोरियों को उजागर कर दिया। कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और औद्योगिक क्षेत्र के कई नगर निगम वार्डों में भाजपा ने या तो बढ़त हासिल की थी या तृणमूल की बढ़त को काफी कम कर दिया था।
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