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"खुफिया जानकारी के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई?", आतंकियों के घरों को गिराए जाने पर TMC का सवाल

जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों के घरों को ध्वस्त किए जाने पर टीएमसी ने सवाल उठाए हैं। टीएमसी ने पूछा कि अगर इन लोगों की ऐसी गतिविधियों के बारे में खुफिया जानकारी थी, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष - India TV Hindi
Image Source : PTI टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष

तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पहलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय कथित आतंकवादियों के घरों को ध्वस्त किए जाने पर सवाल उठाया है। टीएमसी ने रविवार को पूछा कि अगर इन लोगों की ऐसी गतिविधियों के बारे में खुफिया जानकारी थी, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

कश्मीर में 22 अप्रैल को पहलगाम के पास बैसरन में एक आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकतर पर्यटक शामिल थे। इस हमले के बाद कश्मीर के अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए अब तक 9 संदिग्ध आतंकवादियों और उनके समर्थकों के घरों को ध्वस्त कर दिया है।

"बड़ी कार्रवाई के रूप में प्रचारित किया जा रहा"

टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "आतंकवादियों के घरों के ध्वस्तीकरण को पहलगाम हमले के बाद एक बड़ी कार्रवाई के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन ये घर कश्मीर में हैं, जो अमित शाह के गृह मंत्रालय के नियंत्रण में हैं।" उन्होंने लिखा, "अगर खुफिया जानकारी थी, तो उन्हें बिना रोक-टोक के क्यों पनपने दिया गया? कोई पूर्व-निवारक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह विलंबित नाटकीय कार्रवाई हमले की रोकथाम में हुई घोर विफलता को नहीं छिपा सकती।"

"अभिषेक बनर्जी ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात की"

टीएमसी नेता ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात की है और इस बार भी उन्हें इस मुद्दे पर अपनी कड़ी राय दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और आतंकवादियों को मदद प्रदान करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

अभिषेक बनर्जी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया जाए और उसके कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को वापस लिया जाए। यह केवल 'सर्जिकल स्ट्राइक' करने या पाकिस्तान को धमकी देने का समय नहीं है, बल्कि पाकिस्तान को उसी भाषा में जवाब देने का समय आ गया है।" (इनपुट- भाषा)

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