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West Bengal Assembly Elections 2026: दुबराजपुर विधानसभा सीट पर बदलते रहे समीकरण, इस बार BJP और TMC में कांटे की टक्कर

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में दुबराजपुर विधानसभा क्षेत्र बदलते सियासी समीकरणों के लिए जाना जाता है। यहां भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने ही जीत का परचम लहराया है। इस बार भी यहां दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद है।

दुबराजपुर विधानसभा सीट- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV दुबराजपुर विधानसभा सीट

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित दुबराजपुर विधानसभा क्षेत्र राज्य की राजनीति में एक अहम स्थान रखता है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, इसलिए यहां सामाजिक समीकरण और जातीय आधार पर वोटिंग का प्रभाव साफ दिखता है। दुबराजपुर क्षेत्र में ग्रामीण और शहरी इलाके दोनों हैं। यहां कृषि मुख्य पेशा है। धान की खेती, पत्थर खनन और छोटे व्यापार यहां की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं। राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र लंबे समय तक वामपंथी दलों का गढ़ रहा, लेकिन पिछले एक दशक में यहां सत्ता समीकरण तेजी से बदले हैं। राज्य की राजनीति में बदलाव का असर इस सीट पर भी साफ दिखाई देता है।

2016 विधानसभा चुनाव

2016 के चुनाव में इस सीट से नरेश चंद्र बाउरी ने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराया था। उस समय राज्य में तृणमूल कांग्रेस मजबूत स्थिति में थी जिसका असर दुबराजपुर सीट पर देखने को मिला। इस चुनाव में वाम दलों और भाजपा ने भी चुनौती पेश की लेकिन जीत तृणमूल के खाते में गई थी।

2021 विधानसभा चुनाव

2021 में दुबराजपुर सीट पर मुकाबला बेहद रोचक हो गया था। इस बार अनूप कुमार साहा ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीत लिया था। साहा ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को कड़े मुकाबले में पराजित किया था। 2021 का चुनाव पूरे पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा गया था। दुबराजपुर भी इस राजनीतिक संघर्ष का अहम केंद्र था।

दुबराजपुर में कितने मतदाता?

दुबराजपुर में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग ढाई लाख के आसपास मानी जाती है। इनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है। पिछले चुनाव में यहां मतदान प्रतिशत 80 फीसदी के करीब रहा था। स्थानीय मुद्दों की बात करें तो रोजगार, सड़क और पेयजल की समस्या प्रमुख हैं। पत्थर खनन उद्योग से जुड़े पर्यावरणीय सवाल भी यहां चुनावी बहस का हिस्सा बनते रहे हैं। 

दुबराजपुर में दिलचस्प मुकाबले के आसार

दुबराजपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां मतदाता बदलाव के लिए तैयार रहते हैं। 2016 में तृणमूल कांग्रेस और 2021 में भाजपा की जीत इस बात का संकेत है कि यह सीट अब पूरी तरह प्रतिस्पर्धी बन चुकी है। आने वाले चुनावों में भी यह सीट राजनीतिक रूप से अहम बनी रहेगी।आने वाले चुनावों में भी यह सीट बीरभूम जिले की सबसे चर्चित सीटों में से एक बनी रह सकती है।

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