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जिस आतंकी पर अमेरिका ने घोषित किया था ईनाम, वही बना सीरिया का राष्ट्रपति तो ट्रंप ने माफ किया गुनाह

डोनाल्ड ट्रंप का सीरिया पर से बैन हटाने का ​यह निर्णय न केवल अमेरिका-सीरिया संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है, बल्कि यह पश्चिम एशिया में संतुलन की राजनीति और वैश्विक कूटनीति की दिशा में संभावित बदलाव का संकेत भी देता है। साथ ही यूएस की आतंक विरोधी नीतियों पर सवाल भी उठाता है।

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। - India TV Hindi
Image Source : AP डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति।

दमिश्कः अमेरिका ने जिस आतंकवादी पर कभी करोड़ों का ईनाम घोषित किया था और आतंकी गतिविधियों के चलते उसके पूरे देश पर ही प्रतिबंध लगा रखा था, जब वही शख्स ताकत के बल पर सीरिया का राष्ट्रपति बन गया तो डोनाल्ड ट्रंप ने उसके सारे गुनाह माफ कर दिए। हम बात सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की कर रहे हैं, अमेरिका ने जिनके सारे गुनाहों को माफ कर दिया। पिछले दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अल-शरा से मुलाकात करने के बाद सीरिया पर लगे सभी तरह के बैन भी हटा लिए। अब सीरिया ने अमेरिका के इस निर्णय का स्वागत किया है। 

यह घटना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़े मोड़ को दर्शाती है, जिसमें अमेरिका ने अप्रत्याशित रूप से सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा पर लगे प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया है। अल-शरा, जिनका अतीत अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा रहा है और जिन पर पहले अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया था, अब राजनीतिक वैधता के साथ उभरे हैं। यह परिवर्तन तब सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब में अल-शरा से मुलाकात की और सीरिया पर वर्षों से लगे प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा की।

अमेरिका की आतंक विरोधी नीति पर उठे सवाल

अमेरिका अपने इस निर्णय को सीरिया के पुनर्निर्माण प्रयासों को गति देने की दिशा में एक रणनीतिक कदम के रूप में देख रहा है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि इससे अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीतियों की साख पर सवाल खड़े होते हैं। कई विश्लेषकों का तर्क है कि यह अमेरिका की दोहरी नीति का प्रतीक है, जिसमें एक ओर आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख दिखाया जाता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे नेताओं से हाथ मिलाया जाता है जिनका अतीत संदिग्ध रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर छिड़ी बहस

इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नई बहस को जन्म दिया है। अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति, मानवीय सहायता की आड़ में किए गए राजनीतिक निर्णय, और सहयोगी देशों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठने लगे हैं। यह बदलाव ट्रंप की विदेश नीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। सीरिया और अमेरिका के बीच यह 25 वर्षों में पहली उच्च-स्तरीय बैठक थी, जो सीरिया के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि वह लंबे समय से वैश्विक मंच पर अलग-थलग पड़ा हुआ है। अल-शरा ने अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने पर सैद्धांतिक सहमति दी है, हालांकि सीरियाई सरकार ने इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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