दक्षिण अमेरिका के पराग्वे में बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है। एक बड़े बैंकिंग संकट के बाद राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को पद से हटा दिया गया है जबकि उपराष्ट्रपति पेड्रो एलियाना ने सत्ता की कमान संभाल ली है। राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को नजरबंद रखने का आदेश दिया गया है।
महाभियोग के जरिए पद से हटाया गया
दरअसल, पराग्वे की संसद के उच्च सदन सीनेट ने राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को महाभियोग के जरिए पद से हटा दिया है। उन पर एक बड़े बैंकिंग संकट से जुड़े मामले में गंभीर लापरवाही और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। राष्ट्रपति को पद से हटाए जाने के बाद उपराष्ट्रपति पेड्रो एलियाना ने नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है। वह अगस्त 2028 तक राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार को सीनेट में पेना को हटाने के पक्ष में मौजूद सभी 44 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि एक सदस्य गैर-हाजिर रहा। इस तरह महाभियोग की प्रक्रिया के बाद पेना की राष्ट्रपति पद से विदाई हो गई। इससे पहले उन्होंने गुरुवार को इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन सांसदों ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने के बजाय महाभियोग की प्रक्रिया अपनाने का फैसला लिया।
बैंक के डूबने से शुरू हुआ राजनीतिक संकट
पराग्वे में यह राजनीतिक संकट Ueno बैंक के अचानक बंद होने के बाद शुरू हुआ। बैंक गंभीर वित्तीय संकट और भुगतान क्षमता की कमी से जूझ रहा था। केंद्रीय बैंक ने हस्तक्षेप करते हुए इस वित्तीय संस्थान को अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद लाखों खाताधारक अपनी जमा पूंजी और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच नहीं बना सके।
इस बैंक के साथ राष्ट्रपति पेना के कारोबारी संबंध होने की बात सामने आई थी। आरोप है कि उनके प्रभाव के चलते बैंक को सरकारी स्तर पर फायदा पहुंचाया गया और नियामकीय निगरानी में ढिलाई बरती गई। हालांकि, पेना ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।
पेना के खिलाफ आपराधिक जांच भी शुरू
बैंकिंग संकट के बाद पराग्वे के अटॉर्नी जनरल ने पेना और कई पूर्व अधिकारियों के खिलाफ तीन अलग-अलग आपराधिक मामले शुरू किए हैं। उन पर भरोसे के उल्लंघन और पद के दुरुपयोग समेत कई आरोपों की जांच हो रही है। महाभियोग के जरिए पद से हटाए जाने के बाद पेना को मिलने वाली पूर्व राष्ट्रपति की कानूनी सुरक्षा भी खत्म हो गई है। अभियोजन पक्ष ने उन्हें नजरबंद रखने का आदेश दिया है।
44 साल की उम्र में अगस्त 2023 में राष्ट्रपति बने पेना दक्षिणपंथी कोलोराडो पार्टी से आते हैं। वह पहले अर्थशास्त्री और वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के करीबी लैटिन अमेरिकी नेताओं में उनकी गिनती होती रही है। अमेरिका ने इस राजनीतिक बदलाव के बावजूद पराग्वे के साथ अपने संबंध जारी रखने की बात कही है।
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