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अंटार्कटिका के बर्फ के नीचे मिली 85 नई झीलों से क्या तबाही का खतरा? जानिए क्या कहती है रिसर्च

शोधकर्ताओं ने अंटार्कटिका की मोटी बर्फ के नीचे 85 अज्ञात उप-हिमनद झीलों की पहचान की है, जिससे ज्ञात सक्रिय झीलों की संख्या बढ़कर 231 हो गई है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : AP सांकेतिक तस्वीर

अंटार्कटिका के बर्फ के नीचे 85 नई झीलों की खोज वैज्ञानिकों ने की है। शोधकर्ताओं ने कहा कि ये नई झीलें एक्टिव हैं। इसका अर्थ है कि ये समय-समय पर सूखती और भरती रहती हैं। महीनों और वर्षों में इनका आकार और आकृति बदलती रहती है। इससे पहले इन झीलों के बारे में दुनिया के किसी भी शख्स को पता नहीं था। शोध करने वाली टीम का कहना है कि ये झीलें उप-हिमनद गतिविधि ग्लेशियरों की स्थिरता और अंटार्कटिका की आधारशिला पर उनके घर्षण को प्रभावित करती है, जिसका वैश्विक समुद्र स्तर पर प्रभाव पड़ सकता है। 

झीलों के हरकत पर नजर रखने की जरुरत

यह अध्ययन 19 सितंबर को नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। livescience की रिपोर्ट के मुताबिक, शोध करने वाली टीम का हिस्सा रहीं प्रोफेसर अन्ना हॉग ने कहा कि यह जानना दिलचस्प था कि उप-हिमनद झीलों के क्षेत्र विभिन्न भराव या जल निकासी चक्रों के दौरान बदल सकते हैं। यह दर्शाता है कि अंटार्कटिक उप-हिमनद जल विज्ञान पहले की तुलना में कहीं अधिक गतिशील है। इसलिए हमें भविष्य में इन झीलों के विकास पर नज़र रखनी चाहिए। 

एक्टिव झीलों की संख्या 231 हुई

इस खोज से पहले अंटार्कटिका में 146 सक्रिय झीलें पहले से ही ज्ञात थीं। अध्ययन की प्रमुख लेखिका सैली विल्सन ने एक बयान में कहा कि इस नए अध्ययन से सक्रिय झीलों की कुल संख्या 231 हो गई है और वैज्ञानिकों की इस समझ में इज़ाफ़ा हुआ है कि बर्फ की झीलें कब और कैसे सूखती और फिर से भरती हैं। विल्सन ने कहा कि उप-हिमनद झीलों के भरने और सूखने की घटनाओं का अवलोकन करना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा कि झीलों के भरने की शुरुआत से लेकर सूखने के अंत तक, केवल 36 पूर्ण चक्र ही दुनिया भर में देखे गए थे। हमने 12 और पूर्ण भरने-निकास की घटनाएं देखीं, जिससे कुल संख्या 48 हो गई। 

उप-हिमनद झीलें पिघले हुए पानी के कुंड हैं जो तब बनते हैं जब पृथ्वी के आंतरिक भाग से भूतापीय ऊष्मा बर्फ की चादर के आधार तक पहुंचती है या जब आधारशिला पर बर्फ के घिसने से पर्याप्त घर्षण ऊष्मा उत्पन्न होती है। उप-हिमनद झीलें कभी-कभी समय-समय पर सूख जाती हैं, जिससे पानी का प्रवाह बनता है जो बर्फ की चादर के तल को चिकना बनाता है और उसे आधारशिला पर फिसलने में मदद करता है, जिससे बर्फ का समुद्र की ओर प्रवाह तेज हो जाता है।

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