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Russia-US Friendship: ट्रंप ने पुतिन से बढ़ाई दोस्ती, रूस-अमेरिका में हो गई डील; चीन को होगी चिंता

यूक्रेन युद्ध खात्मे के इरादे से रूस के साथ वार्ता कर रहे ट्रंप प्रशासन ने चीन को भारी चिंता में डाल दिया। रूस और अमेरिका ने अब अपने राजनयिक संचालन को पुनः बहाल करने का फैसला किया है। इससे जाहिर हो रहा है कि ट्रंप रूस के खिलाफ अब नहीं जाने वाले हैं। वह चीन को कमजोर करने की रणनीति पर चल रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के प्रेसिडेंट पुतिन। - India TV Hindi
Image Source : AP अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के प्रेसिडेंट पुतिन।

इस्तांबुल: रूस और अमेरिका के बीच रिश्तों में नजदीकियां लगातार बढ़ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद रूस-अमेरिका के संबंधों के बीच इसे नई शुरुआत और नए वर्ल्ड ऑर्डर के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं अमेरिका और रूस के बीच में गहराते रिश्ते को चीन चिंता की नजर से देख रहा है। इस बीच अमेरिका और रूस ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित करने के वर्षों बाद अपने-अपने दूतावासों का फिर से संचालन को सामान्य बनाने पर चर्चा करने के लिए बृहस्पतिवार को यहां वार्ता की है। इसे रूस-अमेरिका के संबंधों में सुधार के बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप रूस से नजदीकी बढ़ाकर चीन को कमजोर करना चाहते हैं। यह अमेरिका का नई और परिस्थितिजन्य रणनीति का हिस्सा है।  रूसी राष्ट्रपति भवन ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि इस्तांबुल में यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत तथा सऊदी अरब में शीर्ष रूसी और अमेरिकी राजनयिकों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वार्ता के दौरान बनी सहमति के बाद हुई। पिछले सप्ताह रियाद में हुई अमेरिका-रूस वार्ता के जरिये ट्रंप के नेतृत्व में वाशिंगटन की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव और यूक्रेन में युद्ध को लेकर रूस को अलग-थलग करने के अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रयासों से स्पष्ट रूप से अलग होने का संकेत दिया गया।

रियाद में रूस-अमेरिका के बीच वार्ता की शुरुआत

रियाद में मॉस्को और वाशिंगटन युद्ध को समाप्त करने तथा अपने कूटनीतिक एवं आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में काम शुरू करने पर सहमत हुए। इसमें दूतावासों में कर्मियों की बहाली भी शामिल है। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में राजनयिकों के पारस्परिक बहिष्कार, कार्यालयों के बंद होने तथा अन्य प्रतिबंधों के कारण दूतावासों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अंकारा में अमेरिकी दूतावास के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि इस्तांबुल में बृहस्पतिवार की वार्ता में संबंधित राजनयिक मिशनों के संचालन को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

रूसी संसद के उच्च सदन की अध्यक्ष वेलेंटिना मतविएन्को ने बृहस्पतिवार को तुर्किये की यात्रा के दौरान कहा कि अमेरिका-रूस वार्ता से ‘‘हमारे राजनयिक मिशनों के पूर्ण कामकाज को बहाल करने में मदद मिलेगी।’’ पिछले सप्ताह की वार्ता में कोई यूक्रेनी अधिकारी मौजूद नहीं था। क्रेमलिन ने इस बात पर जोर दिया कि यह बैठक अमेरिका के साथ संबंधों और वार्ता को बहाल करने के लिए है, जिससे अंततः शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त होगा।  (एपी) 

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