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पूर्व राष्ट्रपति के शव को कैसे दफनाया जाए? विवाद के बीच लाश पर जाम्बिया सरकार का कब्जा

एडगर लुंगू के अंतिम संस्कार को लेकर परिवार और हाकाइंडे हिचिलेमा सरकार में विवाद बढ़ गया है। अदालतों के विरोधाभासी आदेशों के बीच सरकार ने शव पर कब्जे का दावा किया है, जबकि परिवार असहमत है। दोनों नेताओं के बीच का यह मामला पुराने राजनीतिक मतभेदों से जुड़ा है और अब कानूनी समाधान की प्रतीक्षा है।

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Image Source : AP जाम्बिया के पूर्व राष्ट्रपति एडगर लुंगू और राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा।

जोहान्सबर्ग: जाम्बिया के पूर्व राष्ट्रपति एडगर लुंगू के अंतिम संस्कार को लेकर उनके परिवार और सरकार के बीच विवाद गहरा गया है। इस बीच जाम्बिया सरकार ने दावा किया है कि उसने लुंगू के शव को अपने कब्जे में ले लिया है। जाम्बिया के अटॉर्नी जनरल ने बुधवार को एक बयान जारी कर बताया कि दक्षिण अफ्रीका की एक अदालत के आदेश के बाद लुंगू के शव को सरकार को सौंप दिया गया है। इसके बाद शव को दक्षिण अफ्रीका की राजधानी प्रिटोरिया में स्थित एक अंतिम संस्कार गृह से हटाकर दूसरे स्थान पर ले जाया गया।

पुराने सियासी मतभेदों से जुड़ा है मामला

हालांकि, लुंगू के परिवार ने इस दावे का विरोध किया है। परिवार का कहना है कि एक अन्य आपातकालीन अदालत के आदेश में शव को फिर से उसी अंतिम संस्कार गृह में वापस ले जाने का निर्देश दिया गया है, जहां जून में उनकी मृत्यु के बाद से शव रखा गया था। दोनों अदालतों के आदेशों के बीच विरोधाभास की स्थिति बनी हुई है और उनके विवरण अभी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। यह पूरा विवाद लुंगू और जाम्बिया के वर्तमान राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा के बीच पुराने राजनीतिक मतभेदों से जुड़ा हुआ है। दोनों नेता लंबे समय तक एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।

लुंगू के परिवार ने अपने दावे में क्या कहा?

राष्ट्रपति हिचिलेमा की सरकार चाहती है कि लुंगू का राजकीय सम्मान के साथ जाम्बिया में अंतिम संस्कार किया जाए और उन्हें देश के नेताओं के लिए निर्धारित कब्रिस्तान में दफनाया जाए। वहीं, लुंगू के परिवार का दावा है कि उनकी अंतिम इच्छा थी कि हिचिलेमा उनके शव के पास न आएं और उनके अंतिम संस्कार में कोई भूमिका न निभाएं। पिछले साल जून में भी यह विवाद सामने आया था, जब जाम्बिया सरकार ने दक्षिण अफ्रीका में हो रही लुंगू की अंतिम प्रार्थना सभा को अदालत के आदेश से रुकवा दिया था। उस समय परिवार के सदस्यों को चर्च से निकलकर अदालत जाना पड़ा था।

अज्ञात बीमारी से हुआ था लुंगू का निधन

लुंगू 2015 से 2021 तक जाम्बिया के राष्ट्रपति रहे और उनका निधन 5 जून 2025 को दक्षिण अफ्रीका के एक अस्पताल में एक अज्ञात बीमारी के कारण हुआ था। वह 68 साल के थे। बता दें कि 2017 में राष्ट्रपति रहते हुए लुंगू ने हिचिलेमा को गिरफ्तार करवाया था। हिचिलेमा पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया था और उन्हें 4 महीने तक हिरासत में रखा गया था। हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया और आरोप हटा लिए गए। 2021 के चुनाव में लुंगू को हिचिलेमा से हार का सामना करना पड़ा था।

अब कोर्ट से मामला सुलझने की उम्मीद

हिचिलेमा से चुनावों में हारने के बाद लुंगू ने आरोप लगाया था कि जाम्बिया पुलिस उनकी गतिविधियों को सीमित कर रही है और उन्हें राजनीतिक वापसी से रोकने के लिए नजरबंद जैसा व्यवहार किया जा रहा है। हालांकि हिचिलेमा की सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया था। फिलहाल, लुंगू के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद अभी भी जारी है और यह मामला कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही सुलझने की उम्मीद है।

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