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होर्मुज को लेकर टूट गया फ्रांस के सब्र का बांध? एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप लाल सागर की ओर रवाना

ईरान-होर्मुज तनाव के बीच फ्रांस ने अपना एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप लाल सागर की ओर भेजा है। राष्ट्रपति मैक्रों ने इसे समुद्री सुरक्षा बहाल करने का रक्षात्मक मिशन बताया। ब्रिटेन सहित कई देश इसमें शामिल हो सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और बीमा लागत पर भारी असर पड़ा है।

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Image Source : ANI फ्रांस ने अपना एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप लाल सागर की तरफ भेज दिया है।

पेरिस: ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुए मैक्रों ने बुधवार को बताया कि फ्रांस का एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप स्वेज नहर के दक्षिण और लाल सागर की ओर बढ़ रहा है। यह कदम फ्रांस और ब्रिटेन की संभावित संयुक्त रक्षात्मक मिशन की तैयारी के तहत उठाया गया है। फ्रांस का परमाणु ऊर्जा से संचालित युद्धपोत 'चार्ल्स डी गॉल' और उसके साथ मौजूद युद्धपोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक तैनात किया जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं कई जहाज

बता दें कि इन युद्धपोतों की तैनाती उसी समुद्री मार्ग पर हुई है, जहां मौजूदा ईरान युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के इलाके में बड़ी संख्या में जहाज फंस गए हैं और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे वैश्विक तेल बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा बताया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन की ओर से प्रस्तावित यह मिशन समुद्री सुरक्षा बहाल करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। बता दें कि फ्रांस समेत तमाम देश चाहते हैं कि जल्द से जल्द होर्मुज में हालात समान्य हों।

'यूरोपीय देश इसमें अपनी भूमिका निभाएंगे'

मैक्रों ने X पर लिखा, 'यह मिशन जहाज मालिकों और बीमा कंपनियों का भरोसा बहाल करने में मदद कर सकता है। यह युद्ध में शामिल पक्षों से अलग एक रक्षात्मक प्रयास होगा।' उन्होंने बताया कि उन्होंने बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की। साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी चर्चा करेंगे। मैक्रों ने कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शांति लौटने से परमाणु मुद्दों, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय स्थिति पर बातचीत आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। यूरोपीय देश इसमें अपनी भूमिका निभाएंगे।'

'ईरान समेत सभी देशों की सहमति जरूरी'

फ्रांसीसी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ के प्रवक्ता कर्नल गियोम वर्ने ने कहा कि फ्रांस, ब्रिटेन और 50 से अधिक देशों के प्रस्तावित गठबंधन की कार्रवाई तभी शुरू होगी, जब 2 शर्तें पूरी होंगी। पहली, समुद्री जहाजों पर खतरा कम हो और दूसरी, जहाजरानी उद्योग को इतना भरोसा हो जाए कि वे दोबारा इस मार्ग का इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने बताया कि किसी भी सैन्य अभियान के लिए पड़ोसी देशों की सहमति जरूरी होगी, जिसमें ईरान भी शामिल है। ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में इस रास्ते को लगभग बंद रखा है।

4-5 गुना तक बढ़ गई है जहाजों की बीमा लागत

बता दें कि जंग की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी हुई है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक बीमा लागत युद्ध से पहले की तुलना में 4 से 5 गुना तक बढ़ गई है। युद्ध शुरू होने के बाद फ्रांस ने होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए बहुराष्ट्रीय पहल की कोशिश शुरू की थी। 17 अप्रैल को पेरिस में आयोजित शिखर सम्मेलन में मैक्रों और कीर स्टारमर ने कई देशों की मेजबानी की थी। इसके बाद 30 से अधिक देशों के सैन्य योजनाकारों ने अभियान की रणनीति को अंतिम रूप दिया था।

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