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ट्रंप से खफा फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने जमकर की भारत की तारीफ, जानें क्या-क्या कहा?

ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी से नाराज फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के Multilateralism की तारीफ की है। इसके अलावा, उन्होंने भारत को भरोसेमंद भी बताया है।

Emmanuel Macron India praise- India TV Hindi
Image Source : PTI (फाइल फोटो) फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं।

पेरिस: जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से बड़े यूरोपीय नेता असहज हैं और ग्लोबल पॉलिटिक्स में नई धुरी बनने लगी है, इस बीच, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भारत की तरफ झुकाव कई मायनों में बड़ा इशारा करता है। ट्रंप से नाखुशी के बीच इमैनुएल मैक्रों ने भारत को Multilateralism, इनोवेशन और रणनीतिक साझेदारी का भरोसेमंद केंद्र बताते हुए खुलकर तारीफ की। इतना ही नहीं उन्होंने अगले महीने फरवरी में भारत आकर इस रिश्ते को और मजबूत करने की घोषणा भी की है।

Multilateralism के लिए की भारत की तारीफ

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कहते हैं, 'पिछले साल हमने AI पर एक समिट आयोजित की थी और पूरी दुनिया इसे देखने के लिए आई थी, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद थे। मैं अगले महीने इन कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए भारत जा रहा हूं। हमने भारत के साथ एक इंटरनेशनल एग्रीमेंट करने में कामयाबी हासिल की है जो Multilateralism का मूल आधार है, एक ऐसा समझौता जो इनोवेशन में विश्वास रखता है लेकिन इसके साथ ही निष्पक्ष नियमों को भी प्राथमिकता देता है।'

रेयर अर्थ मिनरल्स पर भारत-फ्रांस एक साथ

इमैनुएल मैक्रों ने कहा, 'हम फरवरी में भारत के साथ स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करना और रेअर अर्थ मिनरल्स पर सहयोग जारी रखेंगे।'

फ्रांस ने PM मोदी को दिया नैरोबी समिट का न्योता

फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि हम नैरोबी समिट का आयोजन करने जा रहे हैं, जो एक अहम कार्यक्रम है और इसके जरिए हम Entrepreneurship पर काम करने के अपने इस क्रांतिकारी दृष्टिकोण को दिखा पाएंगे। मैंने इसमें प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर को भी नैरोबी में न्योता किया है।

ट्रंप से क्यों नाराज हैं फ्रांस के राष्ट्रपति?

जान लें कि मैक्रों का ये बयान डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले के बाद आया है जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की 31 और अन्य 35 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अमेरिका के अलग होने का आदेश दिया है। इससे दुनिया के तमाम देशों में हलचल है और वे आपसी सहयोग के लिए नए पार्टनर्स की तलाश करने में जुट गए हैं।

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