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लंदन के 'वीरास्वामी' रेस्तरां पर बेदखली का खतरा, महात्मा गांधी भी यहां खा चुके हैं खाना

लंदन का ऐतिहासिक भारतीय रेस्तरां 'वीरास्वामी' बेदखली के खतरे का सामना कर रहा है। बता दें कि इस रेस्तरां में कई मशहूर हस्तियां खाना खा चुकी हैं जिनमें महात्मा गांधी से लेकर ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य तक शामिल है।

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Image Source : VEERASWAMY RESTAURANT लंदन के ऐतिहासिक रेस्तरां 'वीरास्वामी' पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है।

लंदन: दुनिया के सबसे पुराने भारतीय रेस्तरां में गिने जाने वाले वीरास्वामी (Veeraswamy) ने अपनी ऐतिहासिक इमारत से बेदखली को रोकने के लिए भारत सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की है। लंदन के रीजेंट स्ट्रीट स्थित विक्ट्री हाउस में चल रहा यह मिशेलिन स्टार रेस्तरां हाल ही में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है, लेकिन अब इसके सामने अपनी मौजूदा जगह को खोने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, रेस्तरां की बिल्डिंग का मैनेजमेंट देखने वाले क्राउन स्टेट ने कहा है कि वह इसे मुआवजा दे सकता है या दूसरी जगह खोजने में मदद कर सकता है।

एमडब्ल्यू ईट ने भारत सरकार से की ये अपील

रेस्तरां के स्वामित्व वाले ग्रुप एमडब्ल्यू ईट के प्रमुख रंजीत माथरानी ने कहा कि भारतीय खानपान ब्रिटेन में भारत की 'सॉफ्ट पावर' का एक मजबूत प्रतीक है। उन्होंने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों तथा जल्द लागू होने वाले मुक्त व्यापार समझौते के दौर में लंदन के केंद्र से भारतीय इतिहास के इस महत्वपूर्ण हिस्से का गायब होना निराशाजनक होगा। माथरानी ने कहा,

'वीरास्वामी भारतीय पाक-कला की उस उत्कृष्ट परंपरा का प्रतीक है, जिसे भारत ने दुनिया तक पहुंचाया है।'

क्राउन एस्टेट ने लीज बढ़ाने से किया इनकार

विक्ट्री हाउस नाम की जिस बिल्डिंग में यह रेस्तरां है वह ब्रिटिश शाही संपत्ति पोर्टफोलियो का हिस्सा है, जिसका प्रबंधन क्राउन एस्टेट करता है। क्राउन एस्टेट का कहना है कि बिल्डिंग के रेनोवेशन की जरूरत के चलते रेस्तरां की लीज को रिन्यू करना संभव नहीं है। क्राउन एस्टेट के प्रवक्ता ने कहा कि विक्ट्री हाउस को आधुनिक मानकों के अनुरूप बनाने और उसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए रेनोवेशन जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि ग्रेड-II सूचीबद्ध विरासत भवन होने के कारण रेनोवेशन की प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है।

हजारों लोगों ने चलाया 'सेव वीरास्वामी' कैंपेन

वीरास्वामी को बचाने के लिए इस वर्ष फरवरी में रेस्तरां के कर्मचारियों और मैनेजमेंट ने 'सेव वीरास्वामी' अभियान के तहत 20 हजार से अधिक लोगों के हस्ताक्षरों वाली ऑनलाइन याचिका बकिंघम पैलेस पहुंचाई थी। यह याचिका ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय से रेस्तरां को बचाने की अपील के रूप में दी गई थी। रंजीत माथरानी ने कहा,

'इस ऐतिहासिक रेस्तरां में कभी महात्मा गांधी भी आ चुके हैं। इसके अलावा ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय, प्रिंसेस ऐन और कई विदेशी शाही परिवारों के सदस्य भी यहां भोजन कर चुके हैं।'

'हम खुद ही रेनोवेशन कराने के लिए तैयार हैं'

एमडब्ल्यू ईट का दावा है कि उसने क्राउन एस्टेट को कई व्यवहारिक विकल्प सुझाए हैं, जिनमें भवन के नवीनीकरण कार्य का प्रबंधन स्वयं करने का प्रस्ताव भी शामिल है। कंपनी ने यह भी पेशकश की है कि यदि भवन को कार्यालयों में बदला जाता है तो उससे मिलने वाले संभावित किराये के बराबर किराया देने को भी तैयार है। कंपनी का कहना है कि इस विवाद के कारण ब्रिटिश करदाताओं का लाखों पाउंड का नुकसान हो रहा है, क्योंकि किराये की आय रुक रही है और कानूनी खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।

29 जून से शुरू हो रही है कानूनी सुनवाई

रेस्तरां की लीज और किरायेदारी अधिकारों से जुड़े मामले की सुनवाई सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में 29 जून से शुरू होगी। यह सुनवाई 5 दिनों तक चलेगी। वहीं, क्राउन एस्टेट का कहना है कि उसने एमडब्ल्यू ईट द्वारा दिए गए सभी वैकल्पिक प्रस्तावों की समीक्षा की है, लेकिन उसे ऐसा कोई विकल्प नहीं मिला जो हेरिटेज बिल्डिंग की सुरक्षा, कानूनी दायित्वों और सार्वजनिक धन के उचित प्रबंधन की उसकी जिम्मेदारियों को पूरा करता हो। अब कुल मिलाकर इस ऐतिहासिक भारतीय रेस्तरां का भविष्य अदालत के फैसले पर टिका है।

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